15 साल पहले है हमारी जिंदगी का अहम हिस्‍सा थी ये 15 चीजें, लेकिन अब नहीं है

एक पुरानी कहावत हैं परिवर्तन ही जिंदगी हैं। जब हम अपने आस-पास देखते हैं तो हमें यह कहावत यर्थात होती नजर आती हैं। आज हर चीज समय के साथ बदल रही हैं जिसे हम साफ तौर पर महसूस कर सकते हैं। समय जैसे-जैसे आगे बढ़ता हैं, वैसे ही जीवन में परिवर्तन आते जाते हैं। हम चाह कर भी समय के पहिये को परिवर्तन लाने से नहीं रोक सकते हैं। इसे हम नियति का नाम भी दे सकते हैं।

समय के साथ जो बदलाव होते हैं वो अच्‍छे भी हो सकते है और बुरे भी। ऐसे ही कई बदलाव हमारी दिनचर्या में आए हैं। ऐसा बहुत कुछ हैं जो पहले हमारी जीवनचर्या का अहम हिस्‍सा था लेकिन आज उसका अस्त्वि भी नहीं रहा।

क्‍या आप भी करते हैं इन चीजों को मिस?

अगर हम 15 साल पहले की बात करें तो इस दौरान बहुत कुछ बदल चुका है। आज हम कुछ ऐसी ही चीजों पर नजर डालने वाले हैं जो बदलते वक़्त के साथ हमारे आस-पास से गायब हो गई हैं या उनका इस्‍तेमाल ना के बराबर रह गया हैं।

1. ऑडियो कैसेट 15 साल पहले हमारे साथी हुआ करते हैं लेकिन अब उनकी जगह ढेर सारे Music App आ गए हैं और ऑडियो कैसेट का खजाना रखने की परंपरा खत्‍म हो गई हैं।

2. आज चार फ्रेंड्स साथ में बैठते तो PUBG और ऑनलाइन गेम खेलते नजर आते हैं लेकिन पहले तो कैरम का ही ज्‍यादा क्रेज था।

3. यह की-बोर्ड तो आपको याद ही होगा, आखिर वो वीडियो गेम ही तो था जो हमारे लिए सबसे पहला स्मार्ट गैजेट था।

4. उस दौर में फ़ेसबुक नहीं बल्कि कॉमिक बुक ही मनोरंजन का सहारा हुआ करती थी।

5. D2H का मजा लेने वाली आजकल की जैनरेशन क्‍या जाने ऐंटिना को घुमा-घुमा कर टीवी देखने का सुकून क्‍या होता था।

6. आज एक ही दिन में ढ़ेर भरी सेल्फी ले ली जाती हैं लेकिन पहले रील वाले कैमरे से फोटो क्लिक किए जाते थे, वो भी गिन-गिन कर।

7. स्टूडेंट को Judge करने के लिए बुक्स के कवर ही काफी होते थे।

8. ये स्विच तो भाई बड़े ही काम का था, कभी-कभी तो कपड़े टांगने के काम भी आ जाता था।

9. 15 साल पहले का दौर ही अलग था, जब अपनी पसंद से अलमारी के दरवाज़े पर स्टिकर्स सजाया करते थे।

10. दीपावली पर 2 दिन की कड़ी मशक्कत के बाद बल्बों की झालर तैयार की जाती थी।

11. हमसे पहले मेहमानों का स्वागत ये ‘स्वागतम्’ वाले डोरमैट किया करते थे।

12. अगर खाना जलकर चिपक जाए तो बर्तन घिस-घिसकर हाथ रह जाते थेे। तब हमें कहा पता था कि एक दिन नॉन स्टिकी बर्तन भी आएंगे।

13. यह बल्ब रोशनी तो कम लेते थे लेकिन लाइट का बिल बहुत ज्‍यादा देते थे।

14. लैंडलाइन फ़ोन ही मजाक के लिए बेस्ट ऑप्शन होता था।

15. जब भी बात डेकोरेशन की होती थी तो सबसे पहले सचिन, द्रविड़ या गांगुली के पोस्टर ही लगाए जाते थे।