देसी गोबर से बनाया ‘एअर कंडीशन’ घर, खर्चा सीमेंट की लागत से 7 गुना कम

कैसा रहे कि आपको भरी गर्मी में भी घर में एयर कंडीशन की जरूरत ना पड़े। अगर आप घर बना रहे हैं और चाहते हैं कि बिना एयर कंडीशन के आप आराम से गर्मीयों का सीजन बिता सके तो आपको जरूरत है, हरियाणा के डॉ शिवदर्शन मलिक से मिलने की। दरअसल इन्‍होंने एक वैदिक प्‍लास्‍टर तैयार किया हैं, जिसके उपयोग से आपको गाँव के घर वाली फील आएगी और साथ ही एसी की जरूरत भी नहीं लगेगी।

शिवदर्शन ने इस ‘वैदिक प्लास्टर‘ (Vedic plaster) को देसी गाय के गोबर से बनाया है। दिल्‍ली के रहने वाले दया किशन शोकीन बताते हैं कि इन्होंने ही अपने घर को डेढ़ साल पहले गाय के गोबर से बने प्लास्टर से बनवाया था।

सीमेंट से सस्‍ता और फायदेमंद भी

इन्होंने कहा कि इस तरह से बने घर में गर्मियों में एसी लगाने की ज़रूरत तक नहीं पड़ती हैं। अगर बाहर 40 डिग्री तापमान है तो भी घर के अन्दर 28-31 डिग्री बना रहता हैं। वहीं इसका ख़र्चा दस रुपए स्क्वायर फिट आता हैं जो सीमेंट पर आने वाली लागत से छह से सात गुना कम है।

उन्‍होंने आगे कहा कि इस प्‍लास्‍टर से बने मकान के जितने फायदे गिनाए जाए कम ही होगें। गर्मियों में इस मकान में बने फ़र्श पर नंगे पैर टहलने से पैरों को ठंडक और राहत मिलती हैं। और हमारे शरीर के अनुसार तापमान मिलता है।जिससे बिजली की बचत होती है।

इस गाय के प्‍लास्‍टर की मदद से शहरों में भी गाँव जैसी कच्ची मिट्टी के पुराने घर बनाना सम्भव है। बता दें कि देश में करीब 300 सौ से अधिक लोग किशन शोकीन की तरह देसी गाय के वैदिक प्लास्टर से घर का निर्माण कर चुके है।

नहीं पड़ेगी एसी की जरूरत

पहले मिट्टी से बने कच्‍चे घर ऊष्मा को रोकने में सक्षम थे साथ ही सर्दीयों और गर्मीयों से भी बचाव करते थे। लेकिन ये कच्‍चे मकान समय के परिवर्तन के साथ व्यवहारिक नहीं रहे। ऐसे में इस पर विचार किया जाने लगा कि कैसे पक्के मकानों को कच्चा बनाया जाए जिससे वह ऊष्मा को रोक सके।

हरियाणा के रोहतक में रहने वाले डॉ शिवदर्शन मलिक ने इसी दिशा में काम करते हुए बहुत लम्बे शोध के बाद देसी गाय का एक ‘वैदिक प्लास्टर’ तैयार किया है, जो ना सिर्फ सस्ता हैं, बल्कि घरों को गर्मी में ठंडा और सर्दी में गर्म भी रखता है।

रसायन विज्ञान से पीएचडी कर चुके डॉ शिवदर्शन मलिक आईआईटी दिल्ली, वर्ल्ड बैंक जैसे कई बड़े संस्‍थानों में बतौर सलाहकार कई वर्षों तक कार्य कर चुके हैं।

इस दौरान उन्होंने कई जगह भ्रमण कर कच्चे और पक्के मकानों के बीच का फ़र्क महसूस कर इसकी ज़रूरत समझी और ऐसा घर बनाने का फ़ैसला लिया।

शिवदर्शन मलिक ने वर्ष 2005 से वैदिक प्लास्टर की शुरुआत की। वो कहते हैं कि हमें प्रकृति के साथ रहकर उसे बचाना होगा, जब से हमने घरों को गोबर की लिपाना छोड़ा है, तब से ही बीमारियाँ बढ़नी शुरु हुईं है।

वैदिक प्लास्टर के फायदे अनेक

सबसे ज़्यादा प्रोटीन देसी गाय के गोबर में होने के कारण यह घर की हवा को शुद्ध रखता हैं, इसलिए वैदिक प्लास्टर में इसका इस्तेमाल किया जाता है। डॉ मालिक कहते हैं कि देश में प्रतिदिन करीब 30 लाख टन गोबर निकलता है।

लेकिन इसका सही से उपयोग नहीं हो रहा और ज्यादातर गोबर बर्बाद हो जाता हैं। देसी गाय के गोबर में चिकनी मिट्टी, जिप्सम, ग्वारगम, नींबू पाउडर आदि मिलाकर वैदिक प्लास्टर तैयार किया जाता हैं, जो उष्मा रोधी, ध्वनिरोधक के साथ-साथ अग्निरोधक भी होता हैं।

इस प्लास्टर से तैयार मकान में नमी की समस्‍या नहीं आती हैं और घर प्रदूषण से मुक्त रहता हैं। यह ईंट, पत्थर किसी भी दीवार पर अन्दर और बाहर सीधा तौर पर उपयोग में लाया जा सकता है।

डॉ शिवदर्शन ने कहा कि इस मकान से हानिकारक कीटाणु और जीवाणु भी भाग जाते हैं। जिससे हमें अच्छी सेहत के साथ ही सकारत्मक उर्जा प्राप्‍त होती हैं। वहीं एक वर्ग फुट एरिया में इसकी लागत करीब 20 से 22 रुपए आती है।