होली से पहले केंद्र सरकार की तरफ से बड़ा तोहफा, कर्मचारियों की बढ़ेगी सैलरी

केंद्र सरकार के कर्मचारियों को होली से पहले सैलरी में इजाफे का तोहफा मिल सकता है. केंद्रीय कर्मचारी लंबे समय से (DA) और (DR) एवं हाउसिंग रेंटल अलाउएंस (HRA) बढ़ने का इंतजार कर रहे थे. हलाकि सरकार ने अब तक इस बारे में ऑफिशियल तौर पर कुछ भी नहीं कहा है लेकिन विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार होली से पहले इस बात की घोषणा हो सकती है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई भत्ते में 3 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है. अभी केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. होली से पहले महंगाई भत्ते में 3 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद कुल महंगाई भत्ता बढ़कर 34 फीसदी हो जाएगा. डीए में बढ़ोतरी पर सरकार की घोषणा सातवें वेतन आयोग की सिफारिश पर आधारित होगी।

अभी इतना मिलता है DA

केंद्र सरकार के कर्मचारियों को इस समय बेसिक पे के 31% के बराबर DA मिल रहा है. इससे पहले अक्टूबर, 2021 में सरकार ने DA को 28 फीसदी से बढ़ाकर 31 फीसदी करने का ऐलान किया था. यह बढ़ोत्तरी एक जुलाई, 2021 से प्रभावी हो गई थी. केंद्र सरकार अगर होली से पहले महंगाई भत्ता तीन फीसदी बढ़ाने का फैसला करती है तो केंद्रीय कर्मचारियों को बेसिक पे के 34 फीसदी के बराबर महंगाई भत्ता मिलेगा।

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इस फैसले से करीब 48 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स को फायदा होगा. वही बढ़ती महंगाई के साथ लोगों की आमदनी का बढ़ना भी जरूरी होता है. सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को DA देती है।

इसका मकसद महंगाई दर के इम्पैक्ट को कम करना होता है. बेसिक सैलरी के आधार पर महंगाई भत्ता को कैलकुलेट किया जाता है. केंद्र सरकार आम तौर पर जनवरी और जुलाई में DA और DR से जु़ड़े बेनिफिट्स की रिवाइज करती है. शहरों के हिसाब से कर्मचारियों के DA में अंतर देखने को मिलता है।

कब शुरू हुई थी डीए की शुरुआत

डियरनेस अलाउंस कर्मचारियों के रहने-खाने के स्तर को बेहतर बनाने के लिए दिया जाता है. महंगाई भत्ता इसलिए दिया जाता है कि महंगाई बढ़ने के बाद भी कर्मचारियों को अपना जीवन-यापन करने में कोई परेशानी न हो. हर साल जनवरी और जुलाई में डीए में बदलाव किया जाता है।

आपको बता दें इसकी शुरुआत दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान हुई थी. उस वक्त इसे खाद्य महंगाई भत्ता या डियरनेस फूड अलाउंस कहते थे. भारत में मुंबई में साल 1972 में सबसे पहले महंगाई भत्ते की शुरुआत हुई थी. इसके बाद केंद्र सरकार सभी सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता दिया जाने लगा।