क्‍या मध्य प्रदेश में बदला जा सकता है बीजेपी का सीएम चेहरा? कैलाश विजयवर्गीय ने कहीं ये बड़ी बात

मध्य प्रदेश में आने वाले साल यानी 2023 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसकी तैयारी हर राजनीतिक दल ने शुरू कर दी है। एक तरफ जहां सत्‍ता में वापसी करने को बेताब कांग्रेस पार्टी में भीतरी कलह खत्‍म होने का नाम नहीं ले रही। वहीं विपक्षी कांग्रेस का दावा है कि सत्‍तारूढ़ बीजेपी में सीएम की कुर्सी को लेकर भीतरी तौर पर विवाद चल रहा है।

इन खबरों के बीच भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने सूबे में होने वाले चुनावों में पार्टी नेतृत्व के चेहरे को लेकर बड़ा बयान दिया है।

कौन होगा बीजेपी का सीएम फेस?

कैलाश विजयवर्गीय ने ग्वालियर में मीडिया से बातचीत में एमपी में सीएम फेस को लेकर कहा कि राज्‍य में शिवराज सिंह मुख्यमंत्री हैं, जिनके नेतृत्व में हमारी सरकार अच्छा विकास कार्य कर रही है।

उन्‍होंने कहा कि अभी पार्टी सूबे ने सीएम के चेहरे को बदलने जैसा कोई निर्णय नहीं लिया है बल्कि इस बार अब तक बात भी नहीं हुई है।

इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने विपक्ष पर जमकर निशाना साधते कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों में बता दिया है कि 2024 में जनता क्‍या चाहती है।

उन्‍होंने कहा कि विपक्ष के पास अभी तो नेतृत्व ही नहीं है, पहले उन्‍हें नेतृत्व खड़ा करना चाहिए और फिर मोदी के सामने खड़े होने की बात करना चाहिए।

वहीं दूसरी तरफ खबरें है कि केंद्रीय मंत्री सिंधिया सूबे के अगले सीएम हो सकते हैं। पिछले काफी वक्‍त से सिंधिया जमीनी स्‍तर पर सक्रिय हो गए है।

महाराज की छवि से दूर हो रहे सिंधिया

इतना ही नहीं वह खुद को महाराज की छवि से भी दूर करने का प्रयास करने में जुटे हैं। सिंधिया को हाल ही में एक बार फिर महिला सफाई कर्मी के पैर छुते देखा गया।

इतना ही नहीं मंच से उतरकर केंद्रीय मंत्री नीचे बैठी सफाई कर्मी के पास पहुंचे और उनका हाथ पकड़कर मंच पर लाए और उन्‍हीं से कार्यक्रम का शुभारंभ करने के लिए दीप प्रज्वलित कराया गया।

इसके बाद सिंधिया ने उन्‍हें मंच पर अपने बगल वाली कुर्सी पर बैठाया। वहीं इससे खुश होकर महिला सफाईकर्मी ने कहा कि वह मध्‍य प्रदेश का मुख्‍यमंत्री सिंधिया को बनते देखना चाहती हूँ।

बता दें कि बीजेेेपी ने मध्‍य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की मदद से सरकार बनाई थी। मुख्‍यमंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज सिंधिया अपने समर्थक विधायको के साथ कांग्रेस छोड़ भाजपा में आ गए थे।