अब हालात और झटका मांस पर बीजेपी लेकर आ रही है नया कानून, हिंदुओं, सिखों के लिए हलाल मीट है मना- और मुस्लिम समुदाय में…

यदि आपको मीट खाना पसंद करते हैं तो यह खबर आपके लिए ही है। क्योंकि अब इस पर एक नया कानून बनने जा रहा है। हालांकि नया कानून मीट के व्यापारियों के लिए होगा लेकिन क्या उसका असर मीट खाने वालों के ऊपर भी पड़ने वाला है। दरअसल दक्षिणी दिल्ली नगर निगम इलाके में भारतीय जनता पार्टी रेस्त्रां और मीट व्यापारियों के लिए नए कानून पर विचार कर रही है।

जिसमें रेस्त्रां संचालकों और मीट व्यापारियों को साफ तौर पर यह बताना होगा कि वे अपनी दुकान पर कौन सा मांस बेच रहे हैं यानी उनकी दुकान पर बेचे जाने वाला मांस हलाल है या झटका।

नए कानून को जानने से पहले हम यह जानेंगे कि हालात और झटका मांस में क्या फर्क होता है। हलाल मांस में जानवर की गर्दन को किसी धारदार ह’थिया#र से कलम किया जाता है। वहीं झटका मांस में पहले जानवर को इलेक्ट्रिक शॉट दिया जाता है जिसकी वजह से उसका दिमाग सुन्न पड़ जाता है और दिमाग सुन्न पड़ने के बाद जानवर का सर धड़ से अलग कर दिया जाता है।

बता दें कि हलाल और झटका मांस पर व्यापारियों के लिए कानून बनाने की मूल वजह हिंदू और सिख धर्म हैं क्योंकि हिंदू और सिख दोनों ही धर्मों में हलाल मांस खाना मना है।

हिंदू और सिख समुदायों के लोग सिर्फ झटके का मांस खाना पसंद करते हैं वहीं मुस्लिम समुदाय के लोग हलाल मांस खाते है। क्योकि मुस्लिम समुदाय में झटके का मांस खाना (हराम) माना जाता है। ऐसे में अब इस नए कानून पर विचार चल रहा है। आपको बता दें कि यह प्रस्ताव छतरपुर से पार्षद अनीता तंवर ने नवंबर 2020 में मेडिकल रिलीफ एंड पब्लिक हेल्थ पैनल के सामने रखा जिसके बाद अभी इस पर विचार चल रहा है।

वही अंग्रेजी अखबार TOI की रिपोर्ट के अनुसार बीते गुरुवार को नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब यह प्रस्ताव आगे सदन में जाएगा। स्टैंडिंग कमेटी के चेयर पर्सन राज दत्ता गहलोत ने कहा कि इस कानून के पीछे हमारा मकसद सिर्फ यही है कि ग्राहक को पता चल सके कि उसके सामने कौन सा मांस परोसा जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा समय में एक किस्म के मांस को बेचने के लिए लाइसेंस जारी किया जाता है लेकिन उसकी जगह है ग्राहकों को अलग ही मांस परोसा जाता।

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