इतने कम समय में चकाचौंध और गगनचुंबी इमारतों का शहर कैसे बना दुबई?

‘बुर्ज ख़लीफा’ दुनिया की सबसे ऊंची इमारत जो स्थित हैं संयुक्‍त अरब अमीरात में। यूएई सिर्फ बुर्ज ख़लीफा ही नहीं  अपनी गगनचुंबी इमारतों के लिए फेमस हैं लेकिन यहां हमेशा से ऐसा नहीं था। 30 साल पहले यहां सिर्फ धूल उड़ती थी, वहां आज दुनिया की बेहतरीन सड़कें और अत्याधुनिक मेट्रो दौड़ती दिखाई देती हैं। यूएई ने बहुत ही कम समय में जो विकास किया हैं, वह हर किसी को हैरान कर देता हैं।

आज दुबई में हर तरफ शानदार गगनचुंबी इमारतें नजर आती है। दुनिया भर के पर्यटक और कारोबारी लोग जिनकी पंसद लंदन, पेरिस और न्यूयॉर्क हुआ करते थे, वह भी आज दुबई का रुख़ करते हैं।

1-2 मंजिला घरों से गगनचुंबी इमारतों तक

संयुक्त अरब अमीरात असल में सात राज्यों दुबई, अबू धाबी, उम्मुल क्वैन, शारजाह, अजमान, रास-अल-ख़ैमा और अल फ़ुजैरा का एक संघ है जिसकी राजधानी अबू धाबी है।

लेकिन जब भी यूएई की बात होती हैं तो सबसे पहले दुबई का ही नाम ही आता है। हालांकि अबू धाबी, शारजाह, रास-अल-ख़ैमा और दूसरे राज्‍य भी अपना स्‍थान रखते हैं लेकिन दुबई बस दुबई है।

1 दिसंबर, 1971 को इन्‍हें ब्रिटेन से स्वतंत्रता मिली और 2 दिसंबर को छह राज्यों ने एक संघीय गठबंधन बना लिया जिसमें रास-अल-ख़ैमा सातवें राज्‍य के तौर पर 10 फ़रवरी, 1972 को शामिल हुआ।

यहां अंग्रेज़ों के शासन के दौरान मुद्रा के तौर पर भारतीय रुपया चलता था और इसी में लेन-देन होता हैं। हालांकि 1959 में इसे खाड़ी रुपया कहा जाने लगा, शुरूआत में इसकी क़ीमत भारतीय रुपये के बराबर ही थी।

स्वतंत्रता मिलने के बाद इन राज्यों ने अपनी मुद्रा की शुरुआत की। ब्रिटेन द्वारा यहां तेल की खोज होने के बाद अबू धाबी के शासक शेख़ ज़ायद-बिन-सुल्तान-अल-नाहयान और दुबई शासक शेख़ राशिद-बिन-सईद-अल-मकतूम और यूएई के अन्य नेताओं को अच्‍छी कमाई होने लगी।

बाद में संयुक्त अरब अमीरात के पहले राष्ट्रपति शेख़ ज़ायद और पहले उपराष्ट्रपति शेख़ राशिद बने। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में डॉयरेक्टर ऑफ़ गल्फ़ स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर एके पाशा कहते हैं कि दुबई के लोग आसपास के इलाकों में मोतियों का व्यापार करते थे।

वहीं अन्य व्यापारी भी यहां अपना माल बेचने आते थे। धीरे-धीरे यह क्षेत्र एक व्यापारिक नेटवर्क बनता गया और कुवैत या बसरा के व्यापारी, भारत के केरल, ज़ंज़ीबार या गुजरात जाते वक्‍त दुबई में ज़रूर रुकते थे।

दूरगामी सोच का नतीजा

अमीराती लोगों को मोती के व्यापार से बहुत फ़ायदा हुआ, लेकिन जब कृत्रिम मोती बनाने का तरीक़ा जापानियों ने खोज लिया तो अमीराती मोतियों की मांग कम हुई और यह उद्योग बाद में लगभग ख़’त्म हो गए।

इसके बाद अमीराती लोग तेल के व्यापार में लग गए, स्वतंत्रता के बाद तेल का उत्पादन बढ़ गया जिससे अर्थव्यवस्था को सहारा मिला और दुबई व्यापार के केंद्र के रूप में उभरा।

संयुक्त अरब अमीरात में आज सबसे ज़्यादा भारतीय और पाकिस्तानी रह रहे हैं। भारतीय और पाकिस्‍तानी संयुक्त अरब अमीरात की कुल आबादी का लगभग 40 प्रतिशत है।

दुबई और अबू धाबी के शासकों की दूरदर्शिता का नतीजा ही हैं जो आज यूएई यहां तक पहुंचा हैं। 1979-80 तक यहां धूल उड़ती थी, जहां सिर्फ एक या दो मंज़िला मकान थे। वहीं अब यहां पर दुनिया के लगभग 200 देशों के लोग रहते हैं।