लगातार चीनी सामान का बहिष्कार करने वाली भारत सरकार ने चीन की कंपनी को दिया एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट

भारत के यूं तो 7 पड़ोसी देश हैं। लेकिन उनमें से दो पड़ोसी देश अक्सर चर्चा में रहते हैं। जिनमें से पहला है पाकिस्तान और दूसरा चीन ज्यादातर पाकिस्तान और चीन के चर्चाओं में रहने के कारण सीमा विवाद या व्यापार समझौते ही होते हैं। बता दें हाल ही में चीन और भारत के बीच हुआ सीमा विवाद खूब चर्चा में रहा था. जिसमें चीनी सैनिकों के लद्दाख में गलवान घाटी के तरफ बढ़ने की खबरें आई थी.

बता दें कि चीन के वुहान शहर से निकले कोरोना वायरस की वजह से भी चीन इस वक्त वैश्विक परिदृश्य में सभी देशों का दबाव झेल रहा है वहीं भारत और चीन के रिश्तो में भी काफी नोक झोंक देखने को मिली थी और लद्दाख की गलवान घाटी पर हुए भारत चीन सीमा विवाद की वजह से यह नोक झोंक और बढ़ गई थी.

भारत सरकार ने दिया चीनी कंपनी को बड़ा कॉन्ट्रैक्ट

जिसके बाद भारत देश में लगातार चीनी सामान के बॉयकॉट की खबरें सामने आयीं थीं सोशल मीडिया से लेकर टीवी, अखबारों तक चीनी सामान का बहिष्कार करते दिखे थे यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चीनी सामान को बायकाट करने की बात कही थी और चीन के कई मोबाइल एप्स को बैन कर दिया गया था.

लेकिन अब एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिससे सरकार का दोहरा रवैया देखने को मिल रहा है जिसके बाद यह कहा जा सकता है कि एक ओर जहां सरकार चीनी सामान का बॉयकॉट करती नजर आती है और वहीं दूसरी ओर चीन को ही लाभ पहुंचाने वाले कार्यों को अंजाम देती है.

बता दें कि हाल में भारत सरकार ने चीन की कंपनी को एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट सौंपा है। जानकारी के मुताबिक दिल्ली- मेरठ रैपिड रेल प्रोजेक्ट के लिए नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन ने चीन की एक कंपनी को यह बड़ा कॉन्ट्रैक्ट सौंपा है.

रैपिड रेल प्रोजेक्ट के तहत अशोक नगर और साहिबाबाद के बीच 5 KM लंबा एक टर्नल बनेगा ऐसे में भारत सरकार ने इस टर्नल को बनाने का काम चीन की एक कंपनी शंघाई टनल इंजीनियरिंग को सौंप दिया है। इस कॉन्ट्रैक्ट पर एनसीआरटीसी का कहना है कि इस कॉन्ट्रैक्ट के बाद दिल्ली गाजियाबाद मेरठ प्रोजेक्ट का काम तेजी से चलेगा.

बता दें कि भारत में चल रहे इस रैपिड रेल प्रोजेक्ट की फंडिंग एशियन डेवलपमेंट बैंक कर रहा है और चीन एडीबी का हिस्सा है जिसके आधार पर चीन को इस प्रोजेक्ट से बाहर नहीं किया जा सकता.

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