Birth Anniversary: क्या आपने देखी है इरफान खान बेस्ट मूवी, नहीं देखी हों तो जरूर देखें

बॉलीवुड के साथ ही हॉलीवुड में भी अपने काम से नाम कमाने वाले इरफान खान की आज यानी 7 जनवरी को 55वीं बर्थ एनिवर्सिरी है. हालांकि इस वक्त इरफान खान हमारे साथ मौजूद नहीं है। उन्होंने 54 साल की उम्र में 2020 में 29 अप्रैल को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। इरफान खान को साल 2018 में पता चला की उन्हे न्यूरोइंडोक्राइन ट्यूमर है।

इरफान खान के जाने के बाद उनकी पत्नी सुतापा सिकदार और बड़े बेटे बाबिल खान अक्सर सोशल मीडिया पर उनसे जुड़ी यादों को शेयर करते रहते हैं। इरफान खान का जन्म जयपुर में हुआ था। जब मास्टर डिग्री पूरा कर रहे थे तब उन्हें स्कॉलरशिप मिला और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में काम और पढ़ाई करने का मौका भी मिला।

क्या आपने देखी है इरफान खान की ये फ़िल्में?

एनएसडी के बाद इरफान ने मुंबई का रुख किया। इरफान उस वक्त के मशहूर टेलीविजन शो चाणक्य,बनेगी अपनी बात, भारत एक खोज, चंद्रकांता जैसी धारावाहिकों में भी नजर आए। इरफान खान ने अपने दमदार अभिनय से फिल्म इंडस्ट्री में अलग पहचान पहचान बनाई थी।

फिल्म उद्योग को वह कई और बेहतरीन फिल्में देकर उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। आज भले ही इरफान भले ही इरफान इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी फिल्में देख कर प्रशंसक उन्हें हमेशा याद करते रहते हैं। तो चलिए आज हम आपको बता रहे है इरफान के करियर की बेहतरीन फिल्मों के बारे में,

सलाम बॉम्बे – 1988

इरफान ने 1988 में मीरा नायर की फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ से बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया था। उस बाद कई सालों तक संघर्ष करने के बाद आसिफ कपाड़िया की फिल्म वॉरियर से इरफान को बड़ी पहचान मिली। यह फिल्म साल 2001 में आई थी।

हासिल- 2003

तिग्मांशु धूलिया के निर्देशन में बनी फिल्म ‘हासिल’ में इरफान खान निगेटिव रॉल में थे। इरफान की फिल्म की यह एसी फिल्म थी जिसने बॉलीवुड में सभी का ध्यान उनकी ओर गया था। इस फिल्म के लिए इरफान को फिल्म फेयर का बेस्ट निगेटिव रोल के लिए अवॉर्ड भी मिला।

मकबूल- 2003

विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बनी फिल्म ‘मकबूल’ 2003 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में इरफ़ान लीड रोल में थे। इस फिल्म के लिए इरफान खान को सबसे ज्यादा याद किया जाता है। इरफान के अलावा इसमें तब्बू और पंकज कपूर की अहम भूमिका थी। फ़िल्म की कहानी उनके यानी मकबूल के इर्द-गिर्द घूमती नज़र है।

मकबूल अंडरवर्ल्ड डॉन अब्बा जी का एक वफ़ादार सिपाही होता है, जिसे अब्बा जी की रखैल निम्मी से प्यार हो जाता है। इसी प्यार के चक्कर में वह तब्बू के कहने पर अब्बा जी का ख़ून कर देता है। इरफान के करियर की यह यादगार फिल्म है जिसमें उन्होंने अपने अभिनय से सबकी वाहवाह बटोरी थी।

पान सिंह तोमर – 2010

इरफ़ान के करियर की यह एक एसी फ़िल्म है जिसके लिए उन्हे राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस फ़िल्म की कहानी पान सिंह तोमर नामक एक किरदार की स्टोरी है, जो सेना में भर्ती होता है और भारतीय राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक जीतता है।

किंतु रियारमेंट के बाद जब प्रशासन के द्वारा उसके साथ सही योग्य बर्ताव नहीं किया जाता, तो वह चम्बल का एक मशहूर डाकू बन जाता है।

एक तरह से यह फ़िल्म बताती है कि कई बार परिस्थितियां इंसान को डाकू बनने पर मजबूर कर देती हैं। इस फिल्म का निर्देशन इरफान के करीबी दोस्त तिग्मांशु धूलिया ने किया था।

तलवार- 2017

मेघना गुलजार की फिल्म ‘तलवार’ 2008 में हुए आरुष-हेमराज मर्डर केस पर आधारित है। इरफान ने फिल्म में सीआईडी अफसर अश्विन कुमार की भूमिका निभाई थी। इरफ़ान के अलावा इस फ़िल्म में नीरज काबी, कोंकणा सेन, गजराज राव, अतुल कुमार, तब्बू, और सोहम शाह जैसे एक्टर्स ने काम किया है।

हैदर

इरफान ने ‘हैदर’ फिल्म से विशाल भारद्वाज के साथ एक बार फिर से काम किया। यह फिल्म शेक्सपियर के नाटक हैमलेट से प्रेरित थी। फिल्म में शाहिद कपूर ने हैदर का रोल किया। उनके अलावा केके मेनन और तब्बू भी अहम किरदार मे थे।

लाइफ ऑफ पाई- 2012

हॉलीवुड फिल्म ‘लाइफ ऑफ पाई’ में इरफ़ान एक लेखक को अपनी जिंदगी की कहानी सुनाते हुए देखे जा सकते हैं। अपने जीवन के उस किस्से का जिक्र करते हुए उन्होंने एक नाव पर लंबा वक्त एक शेर के साथ बिताया था।

इस फ़िल्म में इरफान बताते हैं कि खुद भूखे पेट रहकर एक भूखे शेर के सामने बैठना आसान नहीं होता। यह बिल्कुल वैसा होता है, जैसे की आप मृ’त्यु के बिल्कुल पास बैठे हैं। इस फिल्म का निर्देशन ताईवान के निर्देशक आंग ली ने किया है, जिस फिल्म में इरफान के अभिनय की भी खूब सराहना हुई थी।

लंच बॉक्स – 2013

‘द लंच बॉक्स’ इरफान खान के करियर की एक और बेहतरीन फिल्म और अद्भुत फिल्म है। इस फ़िल्म में इरफ़ान ने एक 55-60 साल के एक क्लर्क Sajan Fernandes का रोल किया है, जिसका खाने का डिब्बा किसी दूसरी महिला इला के पति के डिब्बे से बदल जाता है।

साजन को खाना इतना अच्छा लगता है कि वो थैक्यू की एक चिट्ठी उस डिब्बे में छोड़ देता है। इसके बाद शुरू होता है चिट्ठियों का आदान-प्रदान, जोकि दोनों के बीच एक प्रेम कहानी को जन्म देता है।

फिल्म का निर्देशन रितेश बत्रा ने किया था। इसमें इरफान खान के साथ नवाजुद्दीन सिद्दीकी और निमरत कौर ने भी भूमिका निभाई थी। छोटे बजट की इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर दिखाया था। इस फ़िल्म को भारत के बाहर भी सराहा गया था।