इल्मा अफरोज़, घरों में बर्तन माँजने से लेकर आइपीएस बनने तक का सफ़र, ऑक्सफोर्ड से मास्टर्स भी हैं

21वीं सदी में भी भारत में महिलाओं की शिक्षा को लेकर सवाल उठना कम नहीं हुए हैं आज भी भारत के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की शिक्षा का स्तर बेहद निराशाजनक है लेकिन कहते हैं कि जिनमें कुछ करने की चाहत होती है उनके लिए समाज की बेड़ियां बंधन नहीं बनती वे उन बेड़ियों को तोड़कर आसमान छू लेते हैं।

ऐसी ही कुछ कहानी है उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के एक छोटे से कस्बे की रहने वाली इलमा अफरोज की जिन्हें समाज ने रोकना ना तो बहुत चाहा लेकिन उन्होंने इसकी परवाह न करते हुए कभी भी अपने कदम पीछे नहीं हटाए और डट कर अपने रस्ते आगे बढ़ती चली गई।

सेंट स्टीफेंस से ग्रेजुएट है इलमा

बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के छोटे से गांव कुंदरकी की रहने वाली इलमा अफरोज सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएट है किसी ने सोचा नहीं था कि छोटे से गांव की रहने वाली लड़की सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन करेगी लेकिन इलमा का सफर इससे भी आगे का है।

पिता के नि’धन के बाद आई मुसीबत

इलमा महज 14 वर्ष की थीं तभी उनके पिता का निधन हो गया इसके बाद घर में दुखों का मानो पहाड़ सा टूट पड़ा। पिता के नि’धन के बाद एक ओर जहां घर के खर्चे की समस्याएं शुरू हो गई तो वही बेटी की पढ़ाई की चिंता भी बनी हुई थी ऐसे में इलमा की मां कुछ समझ नहीं पा रही थी कि वह आखिर करे तो क्या करें।

पिता के नि’धन के बाद लोगों ने इलमा की मां को समझाया कि वह जल्द से जल्द बेटी का विवाह कर दें और उसकी पढ़ाई में ज्यादा खर्च ना करें जिससे कि यह बोझ उनके सर से हट जाए। लेकिन इलमा की मां को यह मंजूर नहीं था इलमा बचपन से ही पढ़ाई में अब्बल थी जिसके बाद उनकी मां ने दहेज के लिए पैसा ना जोड़कर सारा पैसा उनकी पढ़ाई में लगा दिया।

जब इलमा सेंट स्टीफेंस कॉलेज में पढ़ाई करने के लिए गई तो लोगों ने ताने देना शुरू कर दिया की बेटी हाथ से निकल गई। इलमा बचपन से ही पढ़ाई में अब्बल थीं जिससे उन्हें हायर स्टडीज के लिए स्कॉलरशिप मिली। इसके बाद उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च स्कॉलरशिप से ही निकलने लगा। सेंट स्टीफेंस से पढ़ाई करने के बाद इलमा को यहां से मास्टर्स के लिए ऑक्सफोर्ड जाने का अवसर मिला।

 

इलमा अपने सेंट स्टीफेंस के दिनों को याद करते हुए कहती हैं कि सेंट स्टीफेंस के दिनों को मैं अपने जीवन का सबसे श्रेष्ठ समय मानती हूं जहां मैंने बहुत कुछ सीखा है लेकिन इस बीच मां को लोगों ने खूब खरी-खोटी सुनाई लेकिन उनकी मां ने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा।

यही नहीं जब उन्हें ऑक्सफोर्ड जाने का अवसर मिला तो पड़ोसियों से लेकर रिशेतदारों ने कोई कसर नहीं छोड़ी सभी ने कहा कि बेटी हाथ से निकल जाएगी। एक ओर जहां इलमा की मां की बेटी के लिए गांव में ताने सुन रही थीं तो विलायत में बेटी का संघर्ष भी कम नहीं था।

इलमा यूके में अपने खर्चों को पूरा करने के लिए कभी बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रही थीं तो कभी घर में बर्तन साफ कर रही थीं। ऑक्सफोर्ड से मास्टर्स करने के बाद इलमा को न्यूयॉर्क में शानदार नौकरी का ऑफर मिला लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया और वे स्वदेश लौट आयीं यहां आकर उन्होंने यूपीएससी का सपना देखा और तैयारी में जुट गई।

जिसके लिए उनके भाई और उनकी मां ने भी लगातार प्रोत्साहित किया और नतीजा यह निकला कि 2017 की यूपीएससी की परीक्षा में इलमा को महज 26 साल की उम्र में 217 वीं रैंक मिली।

बता दें कि इलमा ने यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद आईपीएस चुना जब बोर्ड मेंबर्स ने उनसे पूछा कि वह आईपीएस क्यों चल रही हैं तो उन्होंने कहा कि मुझे अपनी जड़ों को सींचना है मुझे अपने देश के लिए काम करना है।

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