बकौल ‘भारतीय मीडिया’ कोयला सिर्फ 4 दिन का बचा है, मज़े की बात ये है कि ख़बर पिछले 10 दिनों से चल रही है

देश में बचा है सिर्फ चार दिनों का कोयला फिर होगी घरों की बत्ती गुल, चार दिन का कोयला फिर अं’धेरी रात इस तरह की खबरें आप पिछले कुछ दिनों से लगातार पढ़ रहे है. 1 अक्टूबर से इस तरह की खबरें लगातार सामने आ रहे हैं. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के बयान के बाद इन खबरों ने और भी अधिक जोर पकड़ा. इसके बाद से कहा जा रहा है कि देश में कोयले की भारी किल्लत है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश के कई बिज’ली घरों के पास अब सिर्फ चंद दिनों का कोयला भंडार शेष रह गया है और यह भंडार ख’त्म होने के बाद देश भर में बिजली की भारी कमी देखने को मिलेगी और घंटों की बिज’ली क’टौती का सामना जनता को करना पड़ेगा.

आखिर क्या है कोयले के भंडार ख़तम होने के पीछे का सच

देश भर में कोयला से चलने वाले कुल 135 पावर प्लांट मौजूद है. सरकार के नियम कहते हैं कि सभी पावर प्लांट को कम से कम 20 दिनों का रिजर्व कोयला भंडार रखना अनिवार्य है. यह कोयला स्टॉक बैकअप के तौर पर रखा जाता है.

लेकिन हाल ही में आई खबरों के अनुसार सितंबर-अक्टूबर में सभी पावर प्लांट के पास कोयला स्टॉक घटकर सिर्फ कुछ दिनों का ही रह गया है.

3 अक्टूबर को सामने आई खबर के अनुसार देश भर में 25 पावर प्लांट ऐसे हैं जिनके पास महज 7 दिनों का ही कोयला भंडार उपलब्ध है. जबकि 64 पावर प्लांट ऐसे हैं जिनके पास सिर्फ 4 दिनों का कोयला ही शेष बचा है.

चार दिन का कोयला 10 दिन से चल रहा है?

यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि कोयला भंडार में कमी की खबरें 3 अक्टूबर से सामने आई जिनमें कहा गया कि कोयला सिर्फ चार दिनों का बचा हुआ है. लेकिन इस खबर को 10 दिन से भी अधिक हो चुके है और अब भी यही कहा जा रहा है कि कोयला सिर्फ चार दिन का बचा है.

अब सवाल ये उठता है कोयला भंडार अगर सिर्फ चार दिनों का बचा था तो पिछले 10 दिनों से कैसे चल रहा है? अगर आप खबरों पर ध्यान दें तो बड़े-बड़े शहरों और गांव से किसी भी तरह की कोई बड़ी बिजली कटौ’ती की खबरें सुनने में नहीं आई है.

अगर कटौती हुई भी है तो वो बड़े स्तर पर नहीं नहीं की गई है. बता दें कि यह नवरात्रि का सीजन चल रहा है और आप और हम अच्छे से जानते हैं कि इस दौरान देश भर में बिज’ली खपत बढ़ जाती है. लेकिन इसके बाद भी 4 दिनों का कोयला लगातार चलता ही जा रहा, चलता जा रहा है.

ऊर्जा मंत्री ने माना संक’ट करीब

एक इंटरव्यू के दौरान देश की ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा इस साल कोयला भंडार में भारी कमी आई है जिससे देश के सामने एक गंभी’र स्थिति उत्पन्न हुई है. अगर बिजली की मांग में कुछ गि’रावट आती है तब ही स्थिति में सुधार संभव है लेकिन यह अनिश्चित होगा.

उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कहा 40 से 50 हजार मेगावाट क्षमता वाले पॉवर प्लांट के पास सिर्फ तीन से चार दिनों का कोयला ही शेष बचा है. अगले चार-पांच महीने देश के लिए मुश्किल भरे हो सकते हैं जबकि दीपावली का त्यौहार भी करीब आ रहा है और इसमें बिज’ली की मांग में काफी बढ़त होती है.

आपको बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह की खबरें सामने आई है. “मोबाइल फुल चा’र्ज कर लो देश में सिर्फ 4 तसला कोयला बचा है” यह मैसेज आपको भी मिल रहा होगा व्हाट्सएप पर या फेसबुक पर.

हम आपको बता दें कि इस तरह के मैसेज हर साल मिलते ही हैं. बीते कुछ सालों से हर साल कोयले की कमी, बिजली संक’ट की खबरें सामने आती ही है. अखबार और बड़े मीडिया हाउसेस सरकार के ही आंकड़े के आधार पर हर साल यह बताते ही है कि देश के इतने बिजी घरों के पास फलां दिनों का ही कोयला शेष बचा है.

हर साल सरकार इस तरह की खबरों को खारि’ज कर देती थी. लेकिन इस बार सरकार खुद इस बात को मान रही है कि देश कोयला भंडार में भा’री कमी और बिजली संक’ट का सामना कर रहा है.

ऐसे में यह तो मानना पड़ेगा कि देश बिज’ली संक’ट के करीब खड़ा है लेकिन सिर्फ चार दिनों का कोयला शेष बचा है फिर बत्ती गुल जैसी खबरें महज अतिशयोक्ति है.

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