धोनी ने दिखा दिया खेतों से सोना कैसे निकाला जाता है, फल और सब्जियों का अटूट उत्पादन देखें

क्रिकेटर से किसान बने धोनी, महेंद्र सिंह धोनी इन दिनों अपने गृह नगरी रांची में है और अपने घर के आसपास खेती करते नजर आ रहे हैं.

हालांकि खेती और किसान कभी पुराने नहीं होते लेकिन जब से किसान आंदोलन शुरू हुआ है तभी से किसानों के साथ कृषि कार्यों की चर्चा भी जोरों से होने लगी है और आज नवीन प्रौद्योगिकी के युग में कृषि के क्षेत्र में नए नए बदलाव ना सिर्फ अब चर्चा का विषय रह गए हैं बल्कि लोग अब इन्हें अपनाने भी लगे हैं। ऐसी खबरें अक्सर टीवी से लेकर सोशल मीडिया तक खूब वायरल होती रहती हैं

जिनमें युवा किसान नए-नए तरीकों से खेती की उपज बढ़ाकर अपनी आय दुगनी चौगुनी कर लेते हैं। ऐसा ही कुछ हाल ही में सामने आया है जहां भारत के मशहूर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी खेती के नए नए प्रयोग करते दिखे। बता दें कि कैप्टन कूल के नाम से मशहूर महेंद्र सिंह धोनी ने जब से क्रिकेट से संन्यास लिया है तब से वे मैदान छोड़कर खेत को ही अपना मैदान बना चुके हैं और उसकी पिच पर अब नए नए प्रयोग कर रहे हैं।

जैविक खेती की तरफ बढ़ रहे हैं धोनी

जिसकी चर्चा अक्सर होती रहती है। बता दें कि क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के पास 43 एकड़ का अपना फार्म हाउस है जिसमें धोनी ने अनानास, अमरूद, प्याज, टमाटर, लौकी और आम की फसल उगाने में सफलता पाई है और इन दिनों धोनी स्ट्रॉबरी पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं ।

दुनिया भर में अब जैविक खेती की चर्चा खूब होने लगी है इसी दिशा में महेंद्र सिंह धोनी भी अब जैविक खेती कर रहे हैं। वे इसके लिए कृषि विशेषज्ञों से सहायता लेकर अपने इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं।

बता दें कि जैविक फल सब्जी थोड़े महंगे जरूर होते हैं लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं। धोनी इन जैविक फल सब्जियों को कम कीमत पर मार्केट में उपलब्ध करवा रहे हैं उनका मकसद है कि कम कमाई करके भी लोगों को जैविक उत्पादों की तरफ मोड़ा जा सके।

यही नहीं धोनी अपने फार्म हाउस में पशुपालन भी करते हैं बता दें कि कैप्टन कूल ने झारखंड के किसानों को अच्छी नस्ल की गाय उपलब्ध करवाने का बीड़ा उठाया है जिसमें वे पशु विशेषज्ञों की सहायता से इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं यही नहीं धोनी ने अपने फार्म हाउस में झाबुआ से कड़कनाथ मुर्गे की नस्ल मंगवाई है।

बता दें कड़कनाथ मुर्गे का खून काला होता है। इसके मांस को काफी पौष्टिक माना जाता है। ऐसे में कैप्टन कूल का यह आईडिया झारखंड सरकार को भी बेहद पसंद आया है और धोनी के जैविक फल सब्जियों की मांग अब दुबई तक होने लगी है।