शख्‍स ने की फ्लाइट में सिर्फ महिला क्रू रखने की मांग, दिया माथा खराब करने वाला तर्क

समाज में संतुलन बनाए रखने के लिए महिलाओं को हर क्षेत्र में पुरूषों के बराबर प्रतिनिधित्व मिलने की बात कही जाती है। इंटरनेट पर इस मसले को लेकर हम अक्‍सर ही बहस होते देखते रहते है। सोशल मीडिया का एक बड़ा वर्ग इस मामले पर लगातार चर्चा करता रहता है।

लेकिन कई बार कुछ लोग अपनी भावनाओं में इतना ज्‍यादा बह जाते हैंं कि ये भी नहीं समझ पाते है कि सही बात को गलत तर्क के साथ कहना भी गलत ही कहा जाता है।

फ्लाइट में हो ऑल विमेन केबिन क्रू

एक शख्‍स ने कुछ ऐसा की काम किया है, इन्‍होंने बात तो सही कही है लेकिन तर्क देने में गचा खा गए। ट्विटर पर इस शख्स ने मांग रखी कि एयर लाइंस को ऑल विमेन केबिन क्रू रखना चाहिए.

यह एक अच्छा विचार है, पर इसके पीछे उन्‍होंने जो तर्क दिया उसने इस विचार की मिट्टी पलीद कर दी. विशाल श्रीवास्तव नाम के एक शख्स ने यह मांग उठाते हुए ट्वीट किया।

उसने लिखा कि एयरइंडिया, एयर एशिया और एयरविस्तारा के पास मेल केबिन क्रू क्यों है? अगर आप फ़ीमेल केबिन क्रू रखते है तो प्लेन का वज़न 100 किलो तक कम हो जाएगा. जिससे आप प्रति फ़्लाइट 1000 रुपए बचा सकते है।

विशाल ने आगे लिखा कि आप दिन भर में 100 से भी ज्‍यादा फ़्लाइट्स ऑपरेट करते हैं तो ऐसे में आप आसानी से सालभर में लगभग 3.65 करोड़ रुपये बचा सकते है।

इनका कहने का मतलब है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम भारी होती हैं जिससे उन्‍हें फ़्लाइट में बतौर केबिन क्रू शामिल करने पर फ़्लाइट का वज़न कम हो जाएगा और तेल का खर्च भी कम आएगा।

इन महाशय से अपनी इस थ्‍योरी से सबको चौंका दिया है। यह मानना कि औरत है तो वज़न कम ही होगा अपने आप में सेक्सिस्ट है. ये बात केबिन क्रू के तौर पर कार्य करने वाले लोगों को ऑब्जेक्टिफाई करता है कि उनके शरीर की बनावट कैसी है, उनका शरीर कैसा होना चाहिए।

वहीं विशाल श्रीवास्तव के ट्वीट का प्रतिक्रिया देते हुए एविएशन के वेटरन माने जाने वाले संजीव कपूर ने कहा कि ये कहना सही है कि जितना कम वज़न होगा उतने ही तेल की बचत होगी.

उन्‍होंने आगे लिखा कि लेकिन ये तर्क ठीक नहीं है, मेरा मानना है कि इससे जेंडर डिस्क्रिमिनेशन होगा. यह गैर कानूनी भी है. बता दें कि संजीव कपूर जेट एयरवेज़ के CEO का पद 4 अप्रैल से संभालने वाले हैं.