‘द कश्मीर फाइल्स’ पर केजरीवाल के बाद अब मनीष सिसोदिया की टिप्‍पणी, कहा नहीं देखी अब तक फिल्‍म, क्योंकि…’

इन दिनों विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) के निर्देशन में बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स'(The Kashmir files) पिछले कई दिनों से सुर्खियों में बनी हुई है। एक तरफ फिल्‍म को दर्शको से फुल सपोर्ट मिल रहा है तो वहीं दूसरी तरफ फिल्म को क्रिटिसाइज भी किया जा रहा है। इसे लेकर लगातार राजनैतिक प्रतिक्रियां देखने को मिल रही है।

हाल ही में दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने फिल्म को यूट्यूब पर डाल देने की बात कही तो वहीं अब फिल्‍म को लेकर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रतिक्रिया दी है।

‘द कश्मीर फाइल्स’ पर सिसोदिया का रिएक्शन

सोमवार को सिसोदिया ने विधानसभा में कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म की कमाई से जुटाए गए 200 करोड़ रुपये का इस्तेमाल विस्थापित कश्मीरी पंडितों के कल्याण और उनके घरों के पुनर्निर्माण में करने की मांग की है।

मनीष सिसोदिया ने जोर देते हुए कहा कि देश के लोगों को कश्मीरी पंडितों के दर्द को करीब से महसूस करना चाहिए न कि उसे करोड़ों रुपये में बेच कर फायदा कमाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि फिल्म द्वारा अर्जित की गई इस बड़ी राशि का उपयोग या तो एक नई कल्याणकारी योजना में किया जाना चाहिए या फिर इस राशि को कश्मीरी पंडितों के लिए काम करने वाले मौजूदा फाउंडेशन को दान में दिया जाना चाहिए।

सिसोदिया ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि मैंने अभी तक फिल्म नहीं देखी है, क्योंकि मैं दिल्ली के बजट में बिजी था। इसलिए मैंं फिल्‍म की गुणवत्ता पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता है।

उन्‍होंने कहा कि यह बहुत अच्‍छा है कि कश्मीरी पंडितों की पीड़ा पर एक फिल्म का निर्माण किया गया और ये फिल्‍म सभी को देखना भी चाहिए। लेकिन उनके दर्द को हमा‍रे द्वारा महसूस किया जाना चाहिए न कि उनकेे दर्द को करोड़ों रुपये में बेचा जाना चाहिए।

उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अब तक फिल्म 200 करोड़ रुपये का करोबार कर चुकी है तो अब पम्पोश एन्क्लेव में रहने वाले या कोंडली तथा अन्य इलाकों में रह रहे गरीब लोगों को भी कश्मीरी पंडितों के ‘दर्द’ को महसूस करने देने चाहिए, इसलिए अब फिल्‍म को यूट्यूब पर फ्रि में हाल देना चाहिए।

इसके साथ ही आप नेता ने यह भी कहा कि फिल्म ने जो 200 करोड़ रुपये की राशि जुटाई है, उसका इस्तेमाल कश्मीरी पंडितों के कल्याण के लिए होना चाहिए, जिससे उनके जले हुए घरों का पुननिर्माण हो सके और उनके मुरझाए बागों को फिर से जीवंत किया जा सके।