मुख्तार अब्बास नकवी ने केंद्रीय मंत्रीमंडल से दिया इस्तीफा, यह ‘बड़ी जिम्मेदारी’ मिलने के संकेत

राजधानी दिल्‍ली से एक बड़ी खबर सामने आई हैं, इसके साथ ही कयासों के बाजार गर्म होने लगे हैं। आज हुई कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। नकवी काफी वक्‍त से अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री पद पर बने हुए थे। जानकारी के अनुसार उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया हैं। आज उन्‍होंने अपनी आखिरी केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में भी हिस्‍सा लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने उनकी जमकर तारीफ की और उनके मंत्री के तौर पर योगदान की सराहना की।

क्‍या नकवी को मिलने वाला हैं ये बड़ा पद?

इसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि अब भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी को पार्टी कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकती हैं। दरअसल उनका राज्‍यसभा में कार्यकाल पूरा हो रहा हैं और इस बार पार्टी ने उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा है। जिसके चलते चर्चाओं और अटकलों का बाजार गर्म होता जा रहा हैं। गौरतलब हैं कि नकवी भाजपा के उन गिने-चुने मुस्लिम चेहरों में से एक हैं जो पार्टी के साथ लंबे वक्‍त से हैं।

बता दें कि मुख्तार अब्बास नकवी के अलावा जदयू के कोटे से राज्यसभा सांसद आरपीसी सिंह का कार्यकाल भी गुरुवार को ख’त्म होने वाला हैं। खबरों के अनुसार नकवी को कोई अहम जिम्मेदारी मिलने वाली हैं। दरअसल उपराष्ट्रपति पद के लिए भी 6 अगस्त को वोटिंग होने वाली हैं।

ऐसे में माना जा रहा हैं कि मुख्तार अब्बास नकवी उपराष्ट्रपति पद के लिए भाजपा के प्रत्याशी बनाए जा सकते हैं। बता दें कि उपराष्ट्रपति पद के लिए बीजेपी की तरफ से उतरने वाले प्रत्याशी की जीत तय हैं, क्‍योंकि इसमें राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य मतदान करते हैं और अभी एनडीए को दोनों सदनों को मिलाकर जीत के लिए जरूरी आकंड़ा मौजूद हैं।

क्‍या नकवी होंगे उपराष्ट्रपति प्रत्याशी?

वहीं दूसरी त‍रफ चर्चा ये भी हैं कि उन्हें जम्मू-कश्मीर उपराज्यपाल नियुक्‍त किया जा सकता हैं, हालांकि इसके लिए आरपीसी सिंह के नाम पर भी चर्चा हैं। बता दें कि नकवी के साथ आरपीसी सिंह ने भी कैबिनेट से इस्‍तीफा दिया हैं। लेकिन अभी तक इस मामले को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई बयान सामने नहीं आया हैं। फिलहाल ये सब अटकलें हैं।

दरअसल नकवी को जम्मू-कश्मीर भेजने की चर्चा इसलिए हैं, क्‍योंकि वहां विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं गुपकार गठबंधन ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। ऐसे में मुस्लिम वोटर्स को रिझाने के लिए भाजपा को किसी मुस्लिम चेहरे की जरूरत हैं।

भाजपा को पीर पंजाल और चिनाब घाटी की 16 सीटें पर जीत हासिल करने के लिए यह जरूरी है कि उनकी पकड़ मुस्लिम वोट बैंक पर बने। ऐसे में राजनीतिक जानकारों का कहना हैं कि बीजेपी अब पसमांदा मुसलमानों पर फोकस करना चाहती हैं। यह काफी पिछड़ा और सुविधाओं से वंचित वर्ग हैं। अगर बीजेपी नकवी को उपराष्ट्रपति बनाती हैं तो उसे इसका लाभ मिल सकता हैं।