मोहम्मद जुबैर को तुरंत रिहा करने का आदेश देते वक्त सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

अल्ट न्यूज के सह संस्थापक और फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। काफी समय से सलाखों के पीछे बंद मोहम्मद जुबैर को आखिर बेल मिल गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जुबैर को सभी मामलों में अंतरिम जमानत देते हुए उन्हें रिहा करने के आदेश दिए हैं। इतना ही नहीं कोर्ट ने इस मामले में उनकी गिरफ्तारी के आदेश पर भी सवालिया निशान लगाते हुए पुलिस से जबाव मांगा हैं। जुबैर दिल्ली पुलिस ने 27 जुन को गिरफ्तार किया था।

मोहम्मद जुबैर को अंतरिम जमानत

इसके बाद उन्हें यूपी पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया था। इसके बाद मोहम्मद जुबैर ने यूपी पुलिस द्वारा अपने खिलाफ दायर मामलों को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखाटाया था लेकिन उन्हें वहां से कोई राहत नहीं मिली थी।

इसके बाद मोहम्मद जुबैर ने यूपी पुलिस द्वारा दायर सभी केसों को खारिज करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी याचिका पर फैसला नहीं आने तक अंतरिम जमानत देने की गुहार लगाई। जिसके बाद अब उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी हैं।

जुबैर को जमानत देते हुए कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल करते हुए संयम से काम लेना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जुबैर को अंतहीन समय तक पुलिस हिरासत में नहीं रखा जा सकता है। इसके साथ ही जुबैर के खिलाफ दायर सभी मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ क्लब करते हुए मामले की जांच आगे बढ़ाने के लिए कहा।

अब इस मामले में एक ही जांच एजेंसी द्वारा जांच की जाएगी। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में जुबैर के खिलाफ दायर की गई 6 FIR को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को ट्रांसफर कर दिए है। इस मामले जांच के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने SIT गठित की दी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भंग कर दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने जुबैर की मुकदमा रद्द करने की मांग को खारिज कर दिया हैं।

पैसे लेकर ट्वीट करने का आरोप

वहीं सुनवाई के दौरान कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के वकिल ने अपना पक्ष रखते हुए जुबैर पर पैसे लेकर ट्वीट करने का आरोप लगाया। सरकार ने कहा कि जुबैर को भड़’काऊ ट्वीट करने के बदले में पैसे मिलते थे। पैसे उतने ही ज्यादा मिलते थे, जितना ज्यादा पोस्ट या ट्वीट भड़’काऊ होता था।

आपको बता दें कि मोहम्मद जुबैर ने यूपी पुलिस द्वारा अपने खिलाफ दायर सभी FIR खारिज करने की मांग अपनी याचिका में की है। इसके साथ ही उन्होंने इस याचिका पर फैसला नहीं आने तक अंतरिम जमानत देने की मांग की थी।