हिमालया के खिलाफ ‘हलाल’ को लेकर चले ट्रेंड के बीच लोग पतंजलि को क्यों खींच लाए? जानिए पूूरा मामला

कर्नाटक में इन दिनों हलाल को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है, इसे लेकर सोशल मीडिया पर ‘बायकॉट हिमालया’ ट्रेंड करता रहा। दरअसल सोशल मीडिया पर एक फोटो शेयर की जा रही है जिसमें हिमालया फार्मास्युटिकल कंपनी के हलाल नीति का पालन करने की बात कही जा रही है। इसमें इस्तेमाल हुए ‘हलाल’ शब्द को मांस से जोड़ कर लोग बायकॉट हिमालया ट्रेंड कराने लगे।

हिमालया के खिलाफ चले इस कैम्पैन में अभिनेता परेश रावल भी शामिल हुए। एक्टर और भाजपा नेता परेश रावल ने अपने एक ट्वीट में लिखा “#बायकॉट हिमालया”। इस ट्वीट को परेश ने अब डिलीट कर लिया है।

परेश रावल ने भी किया हिमालया को बायकॉट

लेकिन इस पर हिमालया ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से प्रतिक्रिया दी, उन्‍होंने लिखा कि आपका धन्यवाद परेश रावल।

उन्‍होंने आगे लिखा हमें नहीं पता कि आप 90 साल पुराने स्वदेशी ब्रांड हिमालया से क्यों नफरत करते हैं, लेकिन परेश जी हम आप से प्यार करते हैं। आपकी अपकमिंग मूवी शर्मा जी नमकीन के लिए बधाई।

वहीं वायरल फोटो में कंपनी कहती है कि वह इस्लामिक नियमों और शरिया का पालन करती है। वह इसे ध्‍यान में रख कर अपने सभी हर्बल और केमिकल उत्पाद तैयार करती हैं।

कंपनी कहती है कि उसके उत्पादों में ऐसे किसी भी पदार्थ का उपयोग नहीं किया गया है, जिसको इस्लाम में प्रतिबंधित कहा गया है।

वहीं इसमें ‘हलाल’ का जिक्र मिलने पर लोगों को लगा कि अपने प्रोडक्टस में हिमालया मांस का इस्तेमाल करती है, जिसके बाद हिमालया के खिलाफ ट्रेंड चलने लगे।

कंपनी ने इन अफवाहों का खंडन करते हुए एक बयान में कहा कि हम साफ करना चाहते हक हिमालया के किसी भी उत्पाद में मांस का इस्‍तेमाल नहीं करती है। सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा गलत है।

उन्‍होंने आगे लिखा कि हलाल प्रमाणीकरण का ये मतलब नहीं है कि उत्‍पाद में animal-derived ingredients का इस्तेमाल किया गया है।

कंपनी ने बताया कि आयात करने वाले कई देशों ने ये नियम बना रखे है और यह नियम शाकाहारी प्रोडक्टस पर भी लागू होते है। इन देशों में निर्यात के लिए ये पॉलिसी सभी कंपनियों को माननी होती है।

हलाल विवाद में पतंजलि

वहीं हिमालया के खिलाफ चल रहे ट्रेंड के बीच कई लोगों ने पतंजलि समेत कई भारतीय ब्रांड्स के हलाल सर्टिफिकेट की तस्‍वीरें सोशल मीडिया पर साझा की।

वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हलाल विवाद में पतंजलि का नाम आने के बाद कंपनी ने हलाल प्रमाणपत्र पर अपनी बात रखी हैं।

कंपनी के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बताया है कि स्वामी रामदेव के पतंजलि प्रतिष्ठान ने हलाल मीट के निर्यात के लिए हलाल प्रमाणपत्र लिया है, ऐसा प्रचार कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां कर रही है। लेकिन इसमें कोई सच्‍चाई नहीं हैं।

यह कंपनियां चाहती है कि भारत में पतंजलि के उत्पादन की बिक्री बंद हो जाए। उन्‍होंने कहा कि हलाल प्रमाण पत्र असल में अरब देशों में आयुर्वेदिक दवाओं के निर्यात के लिए लिया गया है।