10 साल पहले जो चीज 100 रुपये में आती थी, आज वो कितने में आती है, जानें कैसे कटी आपकी जेब?

Retail Inflation in India: गैस हो, पेट्रोल हो, डीजल हो, आटा हो दाल हो, दूध हो या फिर सब्जी आम आदमी के इस्तेमाल में होने वाली रोजमर्रा की हर एक चीजे इतनी मेहगी हो गई है जिसने आम इंसान की खुशियां छीन ली है.भारत जैसे देश में महंगाई का बढ़ना इसलिए भी चिंता बढ़ाता है, क्योंकि अब भी यहां एक आम आदमी की महीने भर की कमाई 12 हजार 500 रुपये के आसपास है. सरकार खुद मानती है कि देश में 80 करोड़ से ज्यादा लोग गरीब हैं.

हम बात करे पिछले तीन साल की तो जब साल 2019 में को-रोना आया था उससे पहले से ही महंगाई ने आम इंसान की कमर तोड़ रखी थी और उसके बाद अब महंगाई ने हालात को और बद से बदतर बना दिया है. हाल ही में सरकार ने महंगाई दर को लेकर जो आंकड़े जारी किए हैं, वो बताते हैं कि देश में महंगाई दर 8 फीसदी के करीब पहुंच गई है.

भारत सरकार के मुताबिक, अप्रैल में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर 7.79% थी. महंगाई की ये दर 8 साल के उच्च स्तर पर है. इससे पहले मई 2014 में महंगाई दर 8.33% थी.

महंगाई दर मतलब है किसी सामान या सेवा की समय के साथ कीमत बढ़ना. इसे हम किसी महीने या साल के हिसाब से मापते हैं. मसलन कोई चीज सालभर पहले 100 रुपये की आती थी, जो अब 105 रुपये में आ रही है. इस हिसाब से इसकी सालाना महंगाई दर 5 फीसदी रही.

वही महंगाई दर बढ़ने का एक सबसे बड़ा नुकसान ये है कि इससे समय के साथ मुद्रा का महत्व कम हो जाता है. यानी, आज आपके पास 105 रुपये एक साल पहले के 100 रुपये के बराबर थे.

कैसे कटी आपकी जेब?

महंगाई दर का आकलन अभी 2012 के बेस प्राइस से किया जाता है. इससे अनुमान लगाया जाता है कि 2012 के 100 रुपये में आप जो चीज खरीद सकते थे, आज वही चीज खरीदने के लिए आपको कितना खर्च करना होगा.

साल 2012 में अगर आप 100 रुपये में कोई सामान खरीदते थे, उससे आज खरीदने के लिए आपको 170.1 रुपये खर्च करने पड़ रहे है. एक साल पहले तक आपको 157.8 रुपये खर्च करने पड़ते थे. यानी, एक साल में उसी सामान को खरीदने के लिए आपको 12.3 रुपये ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं. और जो आपकी इनकम थी वो वही के वही है.

चूंकि, एक साल में ही आपको उसी सामान को खरीदने के लिए 157.8 रुपये की बजाय 170.1 रुपये खर्च करने पड़े, इसलिए सालाना महंगाई दर 7.79% हो गई.

महंगाई मापने के दो इंडेक्स

भारत में महंगाई मापने के दो इंडेक्स हैं. पहला है कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI. और दूसरा है होलसेल प्राइस इंडेक्स यानी WPI. पहला CPI के जरिए रिटेल महंगाई दर निकाली जाती है. वहीं दूसरा WPI से खुदरा महंगाई दर को मापा जाता है.

आप और हम जैसे आम लोग ग्राहक के तौर पर जो सामान खरीदते हैं, वो खुदरा बाजार से खरीदते हैं. सीपीआई के जरिए पता लगाया जाता है कि खुदरा बाजार में जो सामान है, वो कितना महंगा या सस्ता हो रहा है. वहीं, कारोबारी या कंपनियां थोक बाजार से सामान खरीदती हैं. WPI से थोक बाजार में सामान की कीमतों में होने वाले बदलाव का पता चलता है.

दुनिया के कई देशों में WPI को ही महंगाई मापने के लिए मुख्य मानक माना जाता है, लेकिन भारत में CPI को मुख्य पैमाना माना जाता है.