जब पार्क में रखे ट्रैफिक बैरियर को समझ लिया शिवलिंग, दूर-दूर से पूजा करने आने लगे श्रद्धालु

वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे (Survey) पूरा होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद स्थित वजूखाना को सोमवार को सील करने का आदेश दिया गया। साथ ही सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ की तैनाती का भी आदेश दिया है। जिसके बाद प्रशासन ने मस्जिद के भीतर वजूखाना के स्थान पर 9 ताले लगाकर उसे सील कर लिया है.

आजतक की खबर के मुताबिक वजूखाने की सुरक्षा के लिए 24 घंटे CRPF के दो जवानों की ड्यूटी शिफ्ट के हिसाब से लगी हुई है. यानी हर शिफ्ट में दो-दो जवान मुस्तैदी से डटे रहेंगे ताकि उस स्थान को कोई नुकसान ना पहुंचाया जा सके. बता दें मस्जिद के वजूखाने के बीचोंबीच एक आकृति है. जिसे हिंदू पक्ष ने शिवलिंग बताया है. वहीं मुस्लिम पक्ष इसे फव्वारा बता रहा है.

हलाकि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. और इसका फैसला अदालत को करना है. लेकिन इन सबके बीच एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रह है. उस वायरल वीडियो में बताया गया है कि किस तरह अमेरिका के एक पार्क में रखे पत्थर को लोग शिवलिंग समझ कर उससे पूजने लगे थे.

पार्क में पूजे गए शिवलिंग की कहानी

दरअसल, जिस वीडियो को शेयर किया जा रहा है, वो अभी का नहीं बल्कि साल 1993 का है. CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के सैन फ्रेंसिस्कों में सालों पहले एक ऐसी घटना हुई थी. यहां लोगों ने एक ट्रैफिक बैरिकेड को शिवलिंग समझ लिया था और फिर उसकी पूजा-पाठ शुरू कर दी। वही इसको लेकर जैसे जैसे लोगों को पता लगा लोग दूर-दूर से इसके दर्शन के लिए आने लगे.

देखें वो रिपोर्ट-

 

CNN की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह घटना साल 1993 की है. सैन फ्रांसिस्को के गोल्डेन गेट पार्क में एक पत्थर का ट्रैफिक बैरियर रखा था जिसकी पूजा करने दूर-दूर से लोग आने लगे थे. फल, फूल, दूध, शहद चढ़ाते थे और भगवान का आशीर्वाद लेते थे. बाद में यहां पर श्रद्धालु की और से एक मंदिर बनाने की भी मांग उठने लगी जिसे प्रशासन ने खारिज कर दिया.

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार उस पत्थर के ट्रैफिक बैरियर को पार्क से हटाने के फैसले के खिलाफ एक आर्टिस्ट जिनका नाम कालिदास था, वह सामने आए. और उन्होंने एक मुकदमा दर्ज करवाया, लेकिन तब कोर्ट ने उन पर 14 हजार डॉलर का जुर्माना लगा दिया था.

वही जब पार्क में पूजा-पाठ के लिए श्रद्धालुओं की भी’ड़ बढ़ने लगी तो इस पत्थर को सनसेट डिस्ट्रिक्ट के एक स्टूडियो में शिफ्ट कर दिया गया. हलाकि इसमें आस्था रखने वाले इस फैसले से खुश नहीं थे लेकिन सबसे बड़ी बात की श्रद्धा के रंग में रंगे किसी भी श्रद्धालु ने यह नहीं सोचा कि इस की असलियत क्या है.

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक एक क्रेन ऑपरेटर ने यह पत्थर और कुछ और दूसरे पत्थर रखे थे ताकि इन्हें पार्क के एंट्रेंस पर एक बैरिकेड की तरह इस्तेमाल किया जा सके.