MP के इस शख्स ने कायम की मोहब्बत की नई मिसाल, पत्नी को तोहफे में दिया ताजमहल जैसा घर, देखें कैसा हैं अंदर का नजारा

मध्यप्रदेश का बुरहानपुर शहर मुगल सम्राट शाहजहां और मुमताज महल के प्यार का गवाह रहा है, शहर दोनों की अमिट यादों को आज भी अपने आंचल में समेटे हुए हैं. यहां मौजूद शाही महल, शादी हमाम और आहूखाना जैसी ऐतिहासिक धरोहरों इनके प्रेम की यादें आज भी जिन्दा है. शाहजहां और मुमताज के प्रेम की दास्तां काफी प्रसिद्ध रही है.

मुगल बादशाह शाहजहां ने मुमताज की याद में ताजमहल का निर्माण कराया जो दुनिया के सात अजूबों में गिना जाता है, लेकिन अब इस अजूबे की हुबहू नकल ताजमहल बुरहानपुर में भी बनाया गया है.

बनाई गई ताजमहल की हुबहू कलाकृति

जिले के शिक्षाविद व उद्योगपति आनंद प्रकाश चौकसे ने अपनी पत्नी मंजूषा चौकसे के लिए एक ताजमहलनुमा घर बनवाया है, उन्होंने अपनी पत्नी को यह घर उपहार में दिया है. जो जिले ही नहीं बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है.

वहीं ऐतिहासिक शहर का भ्रमण करने के लिए आने वाले पर्यटक इस ताजमहल जैसे घर को भी निहार रहे हैं. शिक्षाविद चौकसे के इस ताजमहलनुमा घर का निर्माण शहर के कंसलटिंग इंजीनियर प्रवीण चौकसे के मार्गदर्शन में किया गया है.

इंजीनियर प्रवीण चौकसे के मुताबिक इस घर के निर्माण का आधार 90 बाय 90 पर रखा गया है, जबकि इसका बेसिक स्ट्रक्चर 60 बाय 60 का है. उन्होंने बताया कि डोम 29 फीट ऊंचा है.

यहां देखें घर के अंदर का नजारा

इस ताजमहलनुमा घर में एक बड़ा आकर्षक हॉल है और दो बेडरूम नीचे दो बेडरूम ऊपर बने हुए हैं. इसके आलावा एक किचन, एक लायब्रेरी भी इस घर में स्थित है. इसके साथ ही एक सर्वसुविधायुक्त मेडिटेशन रूम भी घर में बनाया गया हैं. इसमें ध्यान क्रिया शांतिपूर्ण वातावरण में की जा सकती है.

शिक्षाविद चौकसे ने अपने ताजमहल प्रेम के चलले इस भवन को बुरहानपुर में साकार किया. आपको बता दें कि यह असली ताजमहल की तुलना में तीन गुना छोटा हैं.

दरअसल आगरा में बने ताजमहल का निर्माण बुरहानपुर में ही होना था लेकिन यह निर्माण तीन कारणों के चलते नहीं हो सका. वरिष्ठ इतिहासविद होशंग हवलदार एवं मेजर डा एमके गुप्ता के मुताबिक एक यहां की मिट्टी भूरभरी है जिससे आधार के निर्माण में समस्या बनी.

बुरहानपुर में मुमताज ने ली थी अंतिम सांस

इसके आलावा ताप्ती तट छोटा है उसमें ताजमहल की परछाई नहीं बनने और बाढ़ की समस्या रही. जबकि तीसरा कारण मकराना के मार्बल को यहां तक लाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती, इसी के चलते बुरहानपुर में ताजमहल का निर्माण नहीं हो सका.

गौरतलब है कि शाहजहां की पत्नी मुमताज महल ने बुरहानपुर के किले में प्रसव पीड़ा के दौरान अपनी अंतिम सांस ली थी. यहां के आहुखाना के पाइन बाग में मुमताज महल के पार्थिव शरीर को छह महीने तक सुरक्षित रखा गया था जिसके बाद उसे आगरा के ताजमहल में ले जाया गया था.

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