महाभारत के शकुनि का भारत की इस जगह है मंदिर, दर्शन करने से पूरी होती है लोगों की यह खास मनोकामना

भारत एक ऐसा देश है जहां कई धर्म है और कई पंत है. भारत में मूर्ति पूजा की भी विशेष महत्व है. देश में कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है. देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा की जाती है. भारत में रामायण और महाभारत से जुड़े कई पात्रों की पूजा की जाती है जिनमें रावण तक शामिल है.

वहीं दक्षिण में कुछ जगहें ऐसी भी है जहां महाभारत से जुड़े कुछ नामों को पूजा जाता है. जैसे शकुनि और दुर्योधन पात्रों की भी पूजा की जाती है जबकि शास्त्रों के मुताबिक इन्हीं के कारण महाभारत का युद्ध हुआ था.

मामा शकुनी की पूजा

लोगों का मानना ​​है कि जो व्यक्ति इनकी पूजा-अर्चना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्व होती है. तो चलिए जानते है यह मंदिर देश में कहां स्थित है और कैसे की जाती है पूजा.

केरल के कोल्लम मंदिर मायम्कोट्टू मलंचारुवु मलनाड में मामा शकुनी की पूजा होती है. शकुनी मंदिर जहां स्थित है उस स्थान को पवित्रेश्वरम नाम से जाना जाता है. मामा शकुनी को महाभारत में खलनायक के तौर पर दिखाया गया है.

महाभारत के मुताबिक कुरुक्षेत्र युद्ध के लिए मुख्य रूप से शकुनि को दोषी ठहराया गया था. इसके आलावा वो कई अन्य बुरी चीजों के लिए भी जिम्मेदार रहे.

लेकिन ऐसा माना जाता है कि जब महाभारत का युद्ध समाप्ति की तरफ था तो उन्हें इस बात का बेहद खेद हुआ और उनका मानना था कि उन्होंने जो भी किया वो बहुत ही अर्थहीन था.

सनातन धर्म के मुताबिक शकुनि में कई सात्विक चीजें भी मौजूद थी, इसलिए ही उन्हें पूजा योग्य माना गया है. यहां के लोगों का कहना है कि शकुनि बाद में सात्विक स्वभाव के हो गए थे.

महाभारत के युद्ध में हजारों जा’नें चली गई थी, जिस पर शकुनी को बेहद खेद था. इसी का पश्चाताप करने के लिए उन्होंने गृहस्थ जीवन को त्या’ग कर संन्यास धारण कर लिया.

शकुनी की पूजा करने वालों का कहना है कि मामा शकुनी आत्मिक शांति प्राप्त करने के लिए केरल राज्य के कोल्लम में आए और यहां भगवान शिव की तपस्या करने लगे. शिवजी ने शकुनी की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन भी दिए और उन्हें को सफल बनाया.

बताया जाता है कि शकुनी ने जिस स्थान पर तपस्या की थी, उसी स्थान पर यह मंदिर मौजूद है. इस मंदिर को मायामकोट्टू मलनचारुवु मलनाड मंदिर के तौर पर जाना जाता है.

वर्षों तक की थी भगवान शिव की तपस्या

शकुनि ने यहां एक पत्थर पर बैठकर कठोर तपस्या की थी, मंदिर में इसी पत्थर की पूजा की जाती है. इस स्थान को पवित्रेश्वरम के नाम से ख्यति प्राप्त है.

शकुनि मंदिर में उनकी कोई मूर्ति स्थित नहीं है, यहां सिर्फ यही एक पत्थर है जिसकी लोग श्रद्धा भाव से पूजा करते है. इस मंदिर में शकुनि के अलावा भगवन किरातमूर्ति, देवी भुवनेश्वरी और नागराज की पूजा भी की जाती है.

इसके आलावा यहां पर हर तक मलक्कुडा महोलसवम नामक एक भव्य उत्सव भी आयोजित किया जाता है. जिसमें आसपास के इलाकों से हजारों की तादात में श्रद्धालु शामिल होते है.