महंत की करतूत: पीड़िता ने बयां किया दर्द, मुझे से कहा गया- संत महाराज को खुश कर दो, करोड़ों के मालिक हैं…

मैं उमरी (सतना) की रहने वाली हूं, उम्र 17 साल है। रीवा के रहने वाले विनोद पांडे उर्फ दादा का फोन 28 मार्च की सुबह 10 बजे आया। बोला- कहां हो? तुम्हारा कोई कॉलेज का काम हो तो बताओ। मैंने कहा- फीस जमा करना है, लेकिन लिस्ट में नाम नहीं आ रहा। बोला- रीवा आ जाओ, करवा दूंगा काम। कॉल डिस्कनेक्ट होने के बाद उसने कई बार फोन किए।

मैं रीवा करीब 12.30 बजे पहुंची। उसका फिर कॉल आया और पूछा- पहुंच गई? मेरे हां कहते ही कहने लगा- सैनिक स्कूल की तरफ आ जाओ। मैंने कहा- दादा मैं कॉलेज जा रही हूं। वहां नहीं आ सकती। फीस जमा करने के लिए कॉलेज गई और अपना नंबर ढूंढा, लेकिन नहीं मिला।

संत महाराज को खुश कर दो…

कॉलेज में ही 3 बजे फिर दादा का कॉल आया। कहा- सैनिक स्कूल के पास आओ। खा-पीकर मैं कॉलेज चलकर तुम्हारा काम करा दूंगा। मैंने ऑटो लिया और करीब 4 बज रहे होंगे तब मैं सैनिक स्कूल के पास पहुंची तो फिर से दादा का कॉल आया।

दादा ने फिर फोन किया तो मैंने कहा कि मेरे पास ऑटो के लिए पैसे नहीं हैं, सिर्फ फीस के पैसे हैं। उसने किसी लड़के को भेजने की बात बोली, तोड़ी देर बाद सफेद रंग की कार से एक लड़का आया। उसने 100 रुपए ऑटोवाले को देकर जाने के लिए कह दिया।

वह मुझे कार से सर्किट हाउस ले गया। दूसरी मंजिल पर दादा मिला और बोला कि डरो मत, एक संत आने वाले हैं कुछ देर में, उनसे मिले, आशीर्वाद लो, फिर तुम्हारा काम करवाते हैं।

आधे घंटे बाद एक व्यक्ति कमरे में आया, उसने लाल रंग की धोती कुर्ता पहने थे, लंबे बाल थे। दादा ने पहचान कराते हुए कहा कि संत हमारे साथ खाते-पीते हैं। दोस्त जैसे हैं संत तो दूसरों के लिए हैं।

उसके साथ चेला भी था। दादा ने उसका नाम धीरेंद्र मिश्रा बताया। संत ने दादा से पूछा- दारू वगैरह का इंतजाम है या नहीं। मैं घबरा गई। मैंने जाने के लिए कहा तो दादा ने कहा कि रात हो गई अब कहां जाओगी, संत महाराज को खुश कर दो। बड़े लोगों में उठना-बैठना है। करोड़ों के मालिक हैं।

कुछ देर बाद दादा शराब के पैग बनाने लगा और सभी शराब पीने लगे। मैं बहुत डरी हुई थी और घर जाना चाहती थी, पर वो जाने नहीं दे रहे थे। दादा बोला- संत को प्रसन्न कर दो। संत का चेला बोला- तुम्हारी लाइफ बन जाएगी। इतने में संत ने कहा कि ज्यादा मत समझाओ, समझ जाएगी।

मैं चुपचाप VIDEO बनाने लगी पर संत के देखने पर बंद कर दिया। तभी दीदी का फोन आया तो दादा ने जबरदस्ती मुझसे बुलवाया कि मैं घर नहीं आ सकूंगी, अभी मेरा काम नहीं हो पाया है। हॉस्टल में फ्रेंड के पास रुक रही हूं।

फिर दादा मुझे जबरदस्ती शराब पिलाने लगा और किस करने लगा। मैं भागने लगी तो थप्पड़ मारे। बोला- अब कहां जाएगी। संत की सेवा तो करनी ही पड़ेगी। दादा, संत का चेला और मोनू जो मुझे कार से लेकर आया था। सब कमरे से बाहर चले गए और दरवाजा बाहर से लॉक कर दिया।

संत ने कमरे की लाइट बंद की और मुझे खींचकर बिस्तर पर ले गया। मैं चिल्लाने लगी तो मेरा मुंह दबाकर बोला- मेरी फीलिंग्स समझो। बस किस करने दो। जबरदस्ती की कोई बात नहीं है।

उसने मुझे जबरदस्ती किस किया, मैं फिर चीखी तो बोला- अब तो जबरदस्ती करना ही पड़ेगी। उसने रे’प किया और फिर धमकाते हुए कहा कि मेरे पिता अयोध्या मंदिर के अध्यक्ष हैं। किसी को कुछ कहा तो तेरे मां-बाप और पूरे परिवार को ख-त्म कर डालूंगा, मेरा कुछ नहीं कर पाएगी।

वह अपना मोबाइल खोजने लगा। जब नहीं मिला तो उसने मेरे मोबाइल से दादा को फोन कर कमरा खुलवाया। सभी मुझे नीचे ले गए, वहां कमरे में खाना लगा था, संत मुझे जबरदस्ती सलाद खिलाने लगा। मैंने फिर कहा- मुझे जाने दो।

सभी लोग नशे में थे और मुझे घेरे हुए थे। संत दादा से बोला- इसे किसी होटल में छुड़वा दो। दादा के कहने पर मोनू कार से मुझे किसी होटल में ले जाने लगा। तभी मैंने रास्ते में कार रुकवाई और गेट खोलकर भागने लगी।

मुझे एक परिचित और उसका दोस्त महाराज होटल के पास मिले। मैंने उन्‍हें कहा कि एक कार वाला मेरा पीछा कर रहा है। परिचित मुझे वहां से सीधे सिविल लाइन थाने पहुंचाया। मैं बहुत घबराई हुई थी। रात में पुलिस को कुछ नहीं बता सकी। पिता के थाने ने आने के बाद मुझे हिम्मत मिली फिर FIR कराई।

पीड़िता द्वारा FIR के समय पुलिस को दिया गया बयान