एक समय ICC एलीट पैनल में थे अंपायर, अब लाहौर में बेच रहे है जूते बोले- IPL ने मेरे करियर

सोशल मीडिया पर कुछ तस्‍वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, तस्‍वीरों में एक शख्‍स को जूते बेचते हुए देखा जा रहा हैं। यह पाकस्तिान के लाहौर की बताई जा रही हैं। दरअसल तस्‍वीर में जूते बेचते नजर आ रहे यह शख्‍स एक इंटरनेशनल अंपायर रह चुके हैं। इनका नाम हैं असद रऊफ।  रऊफ पाकिस्तान से आने वाले दिग्गज अंपायर्स में से एक रहे हैं।

रऊफ ने अपने करियर में 170 इंटरनेशनल में अंपायरिंग की हैं। लेकिन इंडियन पेमियर लीग IPL के दौरान रऊफ पर करप्शन के आरोप लगे और बाद में धीरे-धीरे उनका करियर खत्म हो गया।

BCCI ने किया था बैन

कभी ICC एलीट पैनल का हिस्‍सा रहे रऊफ ने अंपायरिंग छोड़ दी और इसी के साथ क्रिकेट से ही दूरी बना ली। वह आजकल लाहौर के एक मार्केट में जूते और कपड़े बेचने का काम कर रहे है।

रऊफ ने एक पाकिस्तानी टीवी चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि उनपर लगाए गए इल्ज़ाम पूरी तरह झूठ थे। उन्‍होंने बताया कि मैंने साल 2000 से 2013 तक इंटरनेशनल लेवल पर अंपायरिंग की हैं।

रऊफ ने 49 टेस्ट, 98 वनडे और 23 T20 मैच में बतौर अंपायर काम किया हैं। पाकिस्‍तानी न्यूज़ चैनल पाक टीवी से बातचीत में 66 साल के रऊफ से बताया कि उन्‍होंने क्रिकेट देखना बंद कर दिया हैं।

उन्होंने बताया कि क्रिकेट से मैंने 2013 के बाद बिल्कुल ही दूरी बना ली, क्योंकि मैं जो काम छोड़ देता हूं, उसे छोड़ ही देता हूं।

आपको बता दें कि BCCI ने साल 2016 में असद रऊफ को पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। रऊफ पर करप्शन के चार्ज थे। IPL2013 के दौरान रऊफ पर सट्टेबाजों से महंगे तोहफे लेने और IPL मैच पर सट्टा लगाने का आरोप लगा था।

आईपीएल में बिता जिंदगी का सबसे अच्‍छा वक्‍त

इससे पहले रऊफ पर साल 2012 में मुंबई की एक मॉडल ने यौन शोषण करने का आरोप भी लगाया था। मॉडल ने पुलिस में मामला दर्ज कराते हुए बताया था कि रऊफ ने उस से शादी का वादा करके उसके साथ छह महीने तक शोषण किया हैं।

यह मामला सामने आने के बाद उन्हें IPL से बाहर निकाल दिया गया था। रऊफ ने कहा कि लड़की वाला मामला आने के बाद भी मैं अगले साल IPL करवाने गया था।

उन्‍होंने कहा कि आईपीएल में उनके साथ हुए इन तमाम विवादों के बाद भी उनका मानना हैं कि उन्‍होंने अपना सबसे अच्छा समय IPL में ही बिताया है।

इन दिनों वह लाहौर के एक बाजार में कपड़ों और जूतों की अपनी दुकान चलाते हैं। इस पर वह कहते हैं कि ये मेरा काम नहीं हैं, इससे मेरे स्टाफ की रोज़ी-रोटी चलती है, इसलिए मैं यह करता हूँ।