ताजमहल के 22 कमरों का रहस्‍य क्‍या है? जानिए क्या है उन तहखानों की हक़ीक़त

अयोध्या बीजेपी मीडिया प्रभारी डॉ. रजनीश सिंह ने 7 मई को ताजमहल के तहखानों को खोलने की याचिका दायर की थी जिसे लेकर देश का मीडिया उस पर 24×7 डिबेट कराने लगा। वही आज याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जमकर फटकार लगाते हुए कहा- कि कल को आप आएंगे और कहेंगे कि आपको जजों के चैंबर में जाना है, तो क्या हम आपको चैंबर दिखाएंगे? इतिहास आपके मुताबिक नहीं पढ़ाया जाएगा।

ताजमहल में बने कमरों को खोलने की याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने खारिज कर दिया। ताजमहल विवाद को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जमकर फटकार लगाई है। जस्टिस डीके उपाध्याय ने कहा कि याचिकाकर्ता PIL व्यवस्था का दुरुपयोग न करें। पहले यूनिवर्सिटी जाएं, PhD करें, तब कोर्ट आएं।

क्या है उन तहखानों की हक़ीक़त ?

दरअसल ताजमहल के तहखाने और बाकी हिस्सा सन् 1900 ई तक जनता के लिए खुला था। कोई भी इन‌ तहखाने तक जा सकता था। कई पीढ़ियों ने इसे देख लिया‌, यहां ना कोई मुर्ति है ना ही यहां कोई चिह्न है। ताज के जो हिस्से बंद किए, वह धार्मिक कारणों से नहीं किये गए, बल्कि ताज में भीड़ और सुरक्षा कारणों से किए गए क्योंकि तहखाने में मौजूद गलियारों के ऊपर ही ताजमहल खड़ा है।

यह एक सच है कि हेरीटेज स्मारक के संरक्षण और पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एएसआई ने पूरे देश में स्मारकों के कुछ हिस्सों को बंद किया। यही नहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और देश के नामी गिरामी संस्थानों के लिए वह तहखाना कई बार खुला है।‌ और ताजमहल की मजबूती परखने के लिए समय-समय पर तहखाने में जाकर उन‌ गलियारों का सर्वे किया गया है जो 3 मीटर तक चौड़ी दिवार के रूप में बनाए गए हैं।

एएसआई ने 16 साल पहले तहखाने का संरक्षण कराया था, लेकिन इसकी मजबूती परखने के लिए नेशनल जियोग्राफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट और रुड़की विश्वविद्यालय ने वर्ष 1993 में भी एक सर्वे कराया था, जिसमें ताजमहल के तहखाने की दीवार तीन मीटर मोटी पाई गई और मुख्य गुंबद पर असली कब्रों के नीचे का हिस्सा ठोस बताया गया।

सर्वे में बताया गया कि मुख्य गुंबद में असली कब्रों के नीचे का हिस्सा खाली नहीं है‌‌ बल्कि ज़मीन है। रुड़की विश्वविद्यालय ने इस सर्वे में इलेक्ट्रिकल, मैग्नेटिक प्रोफाइलिंग तकनीक, शीयर वेब स्टडी और ग्रेविटी एंड जियो रडार तकनीक का उपयोग किया था। ताजमहल पर भूकंप के प्रभाव के लिए रुड़की विश्वविद्यालय के अर्थक्वेक इंजीनियरिंग विभाग ने 1993 में सर्वे कराया।

प्रोजेक्ट नंबर पी-553 ए की रिपोर्ट जुलाई 1993 में जारी की गई। भविष्य के भूकंप की स्थिति में ताजमहल को नुकसान होने की स्थिति के लिए यह सर्वे किया गया था। इसके लिए ताजमहल के तहखानों को खोला गया था, जिसमें गुंबद, मीनारों, तहखानों की दीवारों की मजबूती को जांचा गया‌ तब नींव में कोई स्ट्रक्चर नहीं पाया गया।

क्या ताजमहल में एक भी कमरा नहीं है ?

नेशनल जियोग्राफिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने महताब बाग और ताजमहल का एक साथ सर्वे किया, जिसमें मेग्नेटिक प्रोफाइलिंग तकनीक के इस्तेमाल से पता चला कि ताजमहल और महताब बाग के जो हिस्से जानकारी में है, उनके अलावा फाउंडेशन के कुंओं पर बोर होल ड्रिल 9.50 मीटर गहराई तक किए गए। रिफ्लेक्शन सीस्मिक जांच में ताजमहल की नींव में 90 मीटर तक सख्त चट्टानें पाई गईं।

ताज और महताब बाग की नींव की गहराई नदी किनारे 13 मीटर तक पाई गई। चमेली फर्श के नीचे नदी किनारे की ओर तीन मीटर तक चौड़ी दीवारें मिलीं। पदमश्री से सम्मानित और आगरा सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद रहे केके मुहम्मद के अनुसार तो ताजमहल के तहखाने तो एएसआई के लिए हमेशा से खुले हैं, केवल पर्यटकों के लिए ये बंद हैं।

एएसआई इन‌ तहखानो में जाकर उनकी देखभाल और संरक्षण करती है। वह कई बार तहखाने में संरक्षण कार्यों के लिए गए हैं, पर उन्होंने कोई धार्मिक प्रतीक चिह्न नहीं देखा।