यूपी चुनाव: अवध का बाजीगर कौन? चौथे चरण का मतदान क्या दे रहा रुझान

UP Election 2022 लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तीन चरण की 172 सीटों पर मतदान खत्म हो चुका है. पहले चरण में जहां जाटलैंड इलाके वाली सीटों पर मतदान हुआ था तो दूसरे चरण में मुस्लिम बहुल इलाकों में वोटिंग हुई हैं. तो वही तीसरे चरण में सेंट्रल यूपी के यादव बेल्ट और बुंदेलखंड इलाके की 59 सीटों पर अब तक मतदान हो चुका है.

उत्तर प्रदेश में अब भी 231 सीटों पर मतदान होना बाकी है, जिसमें से चौथे चरण में राज्य के 9 जिलों के 59 विधानसभा क्षेत्रों में 23 फरवरी को मतदान होगा। चौथे चरण में कुल 624 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। जिसमें मुख्य लड़ाई तो बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच है, लेकिन यह चरण कांग्रेस और बीएसपी का भी भविष्य तय करने वाला है.

सियासी दलों की अवध क्षेत्र पर नजर

वही चौथे चरण को लेकर सियासी दलों ने अपनी जोर-आजमाइश शुरू कर दी है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लिए सत्ता में वापसी लिए यह चरण सबसे अहम बताया जा रहा है तो वही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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प्रदेश के 9 जिलों की 59 सीटों पर 23 फरवरी को चौथे चरण का मतदान होगा. उसमें पीलीभीत और बांदा को छोड़कर बाकी सभी जिले अवध क्षेत्र के हिस्से में आते है। रुहेलखंड क्षेत्र के पीलीभीत की 4 सीटें और बुंदेलखंड के बांदा की 4 सीटों पर भी मतदान होना है. अवध के 7 जिलों में वोटिंग होगी, जिसमें लखनऊ, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और फतेहपुर भी शामिल हैं.

लखनऊ में कई बड़े सियासी चेहरे चुनावी मैदान में हैं

चौथे चरण में खास तोर पर सभी की निगाहें लखनऊ, रायबरेली और लखीमपुर खीरी पर टिकी हुई हैं. बता दें इस बार लखनऊ में कई बड़े सियासी चेहरे चुनावी मैदान में हैं. लखनऊ की सबसे हॉट सीट सरोजिनीनगर से बीजेपी ने राजेश्वर सिंह को मैदान में उतारा है तो वही सपा ने प्रोफेसर अभिषेक मिश्र को प्रत्याशी बनाया है.

Abhishek Mishra and Rajeshwar Singh

दरअसल यहां ED के पूर्व अधिकारी नौकरी छोड़ कर सियासी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. वहीं लखनऊ कैंट से बीजेपी के बृजेश पाठक चुनाव लड़ रहे हैं, उनके सामने सपा के राजू गांधी हैं. लखनऊ में कुल 9 विधानसभा सीटें हैं. आपको बता दें यहाँ 2017 के चुनाव में बीजेपी ने 9 में से 8 सीटें पर अपनी जीत हासिल की थी.

लखीमपुर खीरी पर टिकीं है सबकी निगाहें

गौरतलब है की किसान आंदोलन के चलते सुर्खियों में आए लखीमपुर खीरी पर भी लोगों की पेनी नजर है. लखीमपुर खीरी में कुछ सीटों पर सिख मतदाता भी हैं, जो कि निर्णायक हैं. 2017 के चुनाव में लखीमपुर खीरी की सभी 8 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी लेकिन इस बार बीजेपी के लिए लखीमपुर खीरी अहम् चुनौती होगा.

कांग्रेस के पास गढ़ बचाने का मौका

रायबरेली से सोनिया गांधी कांग्रेस की सांसद हैं. रायबरेली कांग्रेस का इकलौता गढ़ बचा है. 2017 के चुनाव में कांग्रेस रायबरेली में 2 सीटें जीती थी, वो भी तब जब समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन था. लेकिन इस बार 2022 के चुनाव से पहले कांग्रेस के दोनों सिटिंग विधायक बीजेपी में जा चुके हैं.

हलाकि इस बार कांग्रेस के सामने अपने गढ़ में इज्जत बचाने का चुनाव नजर आ रहा है। हलाकि सियासी जानकार बता रहे हैं कि रायबरेली में भी मुख्य मुकाबला बीजेपी और सपा के बीच ही है.

जातिगत समीकरणों को साधेगा तीसरा चरण

गौरतलब है की कल यानि 23 फरवरी को जिन 59 सीटों पर विधानसभा का चुनाव होना है, इन सभी सीटों पर ओबीसी और ब्राह्मण वोट सबसे ज़्यादा निर्णायक होंगे. OBC में कुर्मी, निषाद, यादव और लोधी वोट सबसे महत्वपूर्ण है. वही इस बार अवध के कुछ जिलों में ब्राह्मण हार जीत तय करने में अपनी खास भूमिका में दिखाई दे रहे हैं.