महिला ने 500 रुपए उधार लेकर शुरू किया था अपना बिज़नेस, आज बन चुका है करोड़ों का साम्राज्य

देश में हर साल नौकरी के लिए भागम-भाग तेज होती जा रही है। सैकड़ों लोग नौकरी की तलाश में छोटे गॉंवों और कस्‍बों से शहरों की तरफ कदम बड़ा रहे हैं। इन सैकड़ों लोगों की भीड़ में सिर्फ कुछ ही लोग ऐसे होते है, जो छोटे शहरों से बड़े शहरों की तरफ बिजनेस करने के इरादे से जाते हैं। आज हम आपको एक ऐसी ही महिला की कहानी से रुबरू कराने जा रहे हैं, जिन्‍होंने उधार लिए 500 रूपयों से करोड़ों का एम्‍पायर खड़ा कर दिया।

परिवार की आर्थिक तंगी से परेशान हो शहर पहुँची इस महिला ने अपनी एक दोस्‍त से 500 रुपए उधार लिये और आज उनकी मदद से करोड़ों रुपए के करोबार की मालकीन बन चुकी हैं।

कृष्ण यादव के संघर्ष की कहानी

यूपी के बुलंदशहर की रहने वाली कृष्ण यादव (Krishna Yadav) के परिवार की आ‍र्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, जिससे उन्‍हें हर छोटी-छोटी चीजों के लिए समस्याओं का सामना करना पड़ता था। साल 1995 तक उनकी माली हालत और खराब हो गई।

ऐसे में कृष्ण ने खर्च में पति का हाथ बांटने के लिए शहर जाकर नौकरी करने का मन बनाया और वह अपनी एक दोस्त से 500 रुपए उधार लेकर पूरे परिवार के साथ दिल्ली जा पहुँची। लेकिन इतने बड़े शहर में उनके लिए नौकरी ढूढ़ना ढेड़ी खीर साबित हुआ।

अपनी योग्यता के अनुसार काम नहीं मिलने पर उन्‍होंने मजबूरी में कमांडेट बीएस त्यागी के फार्म हाउस की देखभाल करने का काम शुरू कर दिया। इस फार्म हाउस में बेर और करौंदे का बहुत बड़ा बगीचा था, जो मार्केट में ऊंची कीमतों पर बिकते थे।

कृष्ण ने फार्म हाउस में काम करते हुए खेती करने का हुनर सीखा और उन्‍हें यही से अचार बनाने का बिजनेस करने का आइडिया आया। कृष्ण ने साल 2001 में कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर तीन महीने तक खाद्य प्रसंस्करण तकनीक का प्रशिक्षण हासिल किया।

इसके बाद उन्होंने तीन हजार रुपए खर्च करके 5 किलोग्राम मिर्ची और 100 किलोग्राम करौंदे का अचार तैयार किया। इसे बेचकर उन्‍हें 5,250 रुपए का मुनाफा हुआ, जो लागत से दोगुना था।

ऐसे में पहले प्रयास से मिली सफलता ने उनकी हिम्मत बढ़ाई और उन्होंने इस काम को जारी रखा। कृष्ण ने बाज़ार में अचार की मांग को देखते हुए अपने पति से मदद ली। जिसके बाद कृष्ण अचार तैयार करती और उनके पति ठेला लगाकर उसे बेचते थे।

श्री कृष्ण पिकल्स ब्रांड

उस समय बाज़ार में करौंदे का अचार नया था, ऐसे में लोगों को उसका स्वाद काफी रास आया। लोगों से अच्छी प्रतिक्रिया मिलते देख कृष्ण ने बड़े स्तर पर अचार बनाने और बेचने का करोबार शुरू कर दिया।

कृष्ण यादव ने अपनी मेहनत और लगन से मार्केट में अच्छी पहचान और पकड़ बनाई। जिसके बाद उन्होंने श्री कृष्ण पिकल्स नाम ब्रांड की नींव डाली। इस ब्रांड के बैनर तले विभिन्न प्रकार के अचार, मुरब्बे और चटनियाँ तैयार की जाती है।

आज के समय में श्री कृष्ण ब्रांड बाज़ार में विभिन्न प्रकार के पेय पदार्थ बेच रही है, जिनका स्वाद इतना बेहतरीन है कि उसकी डिमांड तेजी से बढ़ती जा रही है।

कृष्ण यादव ने मुश्किल समय में न सिर्फ परिवार पलाने के लिए अपनी कमर कसी बल्कि एक सफल बिजनेस भी खड़ा कर दिखाया। आज उनकी कंपनी बहुमंजिला इमारत में हैं, जिसकी शुरुआत कभी एक छोटी-सी रेहड़ी से हुई थी।

भारत सरकार के महिला एंव बाल विकास मंत्रालय ने कृष्ण यादव को उनकी इस मेहनत और लगन के लिए साल 2016 में महिला दिवस के मौके पर यानि 8 मार्च को नारी शक्ति अवॉर्ड से सम्मानित किया था।

कृष्ण यादव के संघर्ष की यह कहानी उन सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरण स्‍त्रोत हैं, जो अपने घर के आर्थिक हालातों में बदलाव लाने के लिए काम करना चाहती हैं। कृष्‍ण की कहानी हमें बताती हैं कि एक महिला अपने मन में ठान ले, तो वह मुश्किल से मुश्किल राह से गुजर कर सफलता की मंजिले प्राप्‍त कर सकती हैं।